राजपुरा (सुंधा माता):
सुंधा माता के पवित्र आँचल में स्थित राजपुरा की धरा पर शौर्य और स्वाभिमान का अनूठा संगम देखने को मिला। मेवाड़ की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले और महाराणा प्रताप के अभिन्न सहयोगी राणा पूंजा भील की आदमकद प्रतिमा का अनावरण समारोह एक ऐतिहासिक पल बन गया। समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष व पूर्व विधायक नारायण सिंह देवल ने जब प्रतिमा का अनावरण किया, तो फिजाओं में वीर शिरोमणि के जयकारे गूंज उठे।

15 वर्ष की आयु में संभाली कमान, बन गए 'भोमट के राजा'
समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक देवल ने राणा पूंजा के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राणा पूंजा का जीवन संघर्ष और नेतृत्व की मिसाल है। महज 15 वर्ष की अल्पायु में पिता का साया उठने के बाद भी वे डगमगाए नहीं, बल्कि मेरपुर के मुखिया के रूप में अपनी योग्यता साबित की। अपनी संगठन शक्ति और प्रजा के प्रति प्रेम के चलते वे 'भोमट के राजा' कहलाए। 1576 के हल्दीघाटी युद्ध में मुगलों के दांत खट्टे करने में राणा पूंजा का योगदान मारवाड़ ही नहीं, पूरे देश के लिए गौरव का विषय है।
शिक्षा की अलख: 38 करोड़ से बन रहा एकलव्य विद्यालय
देवल ने अपने संबोधन में सिर्फ इतिहास ही नहीं, बल्कि भविष्य की भी बात की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का उत्थान शिक्षा से ही संभव है। उन्होंने बताया कि रानीवाड़ा क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और भील समाज की आवश्यकताओं को देखते हुए जसवंतपुरा में 38 करोड़ की लागत से 'एकलव्य आवासीय विद्यालय' स्वीकृत करवाया गया है, जो निर्माणाधीन है। इसके अलावा आजोदर में भी आवासीय विद्यालय और मालवाड़ा के छबरी बाई भील समाज सेवा संस्थान में 15 लाख की लागत से कमरों का निर्माण समाज में शिक्षा की नई क्रांति लाएगा।
सरकार की प्रतिबद्धता और पारिवारिक रिश्ता
देवल ने जोर देकर कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार काली बाई भील स्कूटी योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से आदिवासी प्रतिभाओं को तराश रही है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को विश्वास दिलाया कि भील समाज के साथ उनका रिश्ता एक नेता का नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य का है और वे हर सुख-दुख में चट्टान की तरह साथ खड़े रहेंगे।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में भाजपा मंडल अध्यक्ष भंवरसिंह राजपुरा ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस दौरान पन्नेसिंह देवल, निवर्तमान जिला प्रमुख राजेश राणा, ब्लॉक मुख्य शिक्षा अधिकारी भाखराराम राणा, जिला परिषद सदस्य रमेश राणा, पंचायत समिति सदस्य दरजाराम राणा, राजू सिंह राजपुरा, जोइताराम भील, हुकमाराम राणा, दरगाराम भील, वेलाराम भील सहित बड़ी संख्या में भील समाज के प्रबुद्धजन और युवा उपस्थित रहे।
एक संदेश
"इतिहास गवाह है कि साधन कम होने पर भी यदि हौसले बुलंद हों, तो राणा पूंजा की तरह साम्राज्य के रक्षक बना जा सकता है। आज के दौर में शिक्षा ही वह हथियार है, जिससे समाज अपनी तकदीर बदल सकता है।"







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