जयपुर/फलोदी | राजस्थान पुलिस स्थापना दिवस के अवसर पर एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने प्रदेश के सबसे खूंखार गैंगस्टर्स में शुमार 007 गैंग के सरगना राजू मांजू को गिरफ्तार कर बड़ी कामयाबी हासिल की है। ₹75,000 के इनामी इस अपराधी को जयपुर से दबोचकर पुलिस ने अपने ध्येय वाक्य 'अपराधियों में भय, आमजन में विश्वास' को सार्थक कर दिखाया है।
एएनटीएफ महानिरीक्षक पुलिस विकास कुमार ने बताया कि अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस दिनेश एम.एन. के निर्देशन में चलाए गए इस विशेष ऑपरेशन का नाम 'मद मार्जार' रखा गया था। राजाराम उर्फ राजू मांजू (पुत्र रावलराम बिश्नोई), जो पिछले 13 वर्षों से अपराध की दुनिया में सक्रिय था, अब पुलिस की गिरफ्त में है।
ब्लॉग पोस्ट: अपराध के 'डॉन' से सलाखों के पीछे तक – राजू मांजू के अंत की पूरी कहानी
पश्चिमी राजस्थान में आतंक का पर्याय बन चुके राजू मांजू की गिरफ्तारी महज एक रूटीन कार्रवाई नहीं, बल्कि पुलिस की चतुराई और धैर्य की जीत है। आइए जानते हैं इस 'स्वयंभू डॉन' के उदय और पतन की पूरी दास्तां:
1. खेल के मैदान से जुर्म की दुनिया तक
राजू मांजू ने अपराध का सफर महज एक क्रिकेट मैच के दौरान हुई मारपीट से शुरू किया था। वर्ष 2013 में पहली बार पुलिस रिकॉर्ड में आने के बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। देखते ही देखते उस पर हत्या, लूट, अपहरण, फिरौती और मादक पदार्थों की तस्करी के 36 से अधिक मुकदमे दर्ज हो गए।
2. 007 गैंग का गठन और आतंक
2017-18 में राजू ने अपने गुरु श्याम पुनिया के साथ मिलकर '007 गैंग' बनाया। श्याम पुनिया के जेल जाने के बाद राजू इस गैंग का सर्वेसर्वा बन गया। उसने फिल्मी अंदाज में प्रतिद्वंद्वी गैंग्स (0029 गैंग, सरपंच गैंग) पर सरेआम गोलियां चलवाकर अपना खौफ कायम किया। ठेकेदारों से वसूली और मादक पदार्थों की तस्करी उसके मुख्य धंधे बन गए।
3. सोशल मीडिया और 'सफेदपोश' बनने की कोशिश
राजू मांजू तकनीक और दिखावे का शौकीन था। इंस्टाग्राम पर उसके 2 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स थे। खुद को 'समाजसेवी' दिखाने के लिए उसने रामदेव गौशाला भी खोली, ताकि युवाओं के बीच अपनी पैठ बना सके और चंदे के नाम पर वसूली कर सके। वह सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ फोटो डालकर सरेआम हथियारों का विज्ञापन करता था।
4. ऑपरेशन 'मद मार्जार': कैसे बिछाया गया जाल?
राजू इतना शातिर था कि वह पुलिस को चकमा देने के लिए 'बिल्ली' जैसी चालें चलता था, इसीलिए ऑपरेशन का नाम 'मद मार्जार' (अहंकारी बिल्ली) रखा गया।
- चाय वाला बना जवान: एएनटीएफ की टीम जयपुर के एक पार्क के पास तीन दिनों तक डेरा डाले रही। टीम का एक जवान वहां चाय की थड़ी पर चाय बेचने लगा ताकि राजू पर नजर रखी जा सके।
- फिल्मी आइडिया पड़ा भारी: राजू ने हाल ही में 'रक्तांचल' मूवी देखी थी, जिससे उसे लगा कि खुद एजेंट बनकर मिलना सुरक्षित है। वह लाल टोपी और काला चश्मा पहनकर पार्क में पहुंचा, लेकिन वहां पहले से तैनात टीम ने उसे पहचान लिया और दबोच लिया।
5. बड़े नेटवर्क से जुड़ाव
जांच में सामने आया है कि राजू मांजू के तार कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग के अनमोल बिश्नोई और रोहित गोदारा से भी जुड़े थे। गैंगस्टर राजू ठेठ की हत्या में इस्तेमाल हथियार भी लंबे समय तक राजू मांजू की सुरक्षा में रखे होने की बात सामने आई है।
सर्कल न्यूज़ नेटवर्क की अपील: > आईजी विकास कुमार ने जनता से अपील की है कि किसी भी अपराधी की सूचना एएनटीएफ कंट्रोल रूम नंबर 0141-2502877 या व्हाट्सएप नंबर 9001999070 पर दें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।







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