एक सुराग ने खोला दूसरा बड़ा राज, एएनटीएफ के 'अष्टांगिक प्रहार' से ध्वस्त हुआ ड्रग्स साम्राज्य
जोधपुर/बाड़मेर। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने मारवाड़ क्षेत्र में पैर पसार रहे एक बड़े ड्रग्स रैकेट का पर्दाफाश किया है। एएनटीएफ ने मुस्तैदी दिखाते हुए बाड़मेर और जोधपुर में समानांतर कार्रवाइयां कर सिंथेटिक ड्रग्स 'एमडी' (मेफेड्रोन) बनाने की दो बड़ी फैक्ट्रियों को नेस्तनाबूद कर दिया है। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में ड्रग्स बनाने का कच्चा माल (प्रिकर्सर केमिकल), उपकरण, एक कार और कुल 6 आरोपियों को दबोचा है।
एएनटीएफ के पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार ने बताया कि राज्य को नशे के प्रकोप से मुक्त करने के लिए फोर्स का 'अष्टांगिक प्रहार' अभियान चल रहा है। अतिरिक्त महानिदेशक दिनेश एमएन के मार्गदर्शन में टीमों ने इस बार नशे की खेप के बजाय, उसके उत्पादन के मूल प्रिकर्सर केमिकल '2-ब्रोमो-4-मिथाइलप्रोपियोफिनोन' पर चोट की है, ताकि 'न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी' की तर्ज पर जहर बनने की प्रक्रिया को शुरुआत में ही कुचला जा सके।

बाड़मेर में भंडाफोड़: खेत के कमरे में पकड़ी गई पहली फैक्ट्री
एएनटीएफ की टीम को मारवाड़ क्षेत्र में अवैध मादक पदार्थ की फैक्ट्री संचालित होने का एक खुफिया इनपुट मिला था। टीम ने जब कड़ियों को जोड़ा, तो तार बाड़मेर के धोरीमन्ना (धनाऊ) क्षेत्र से जुड़े।
- खेत पर छापा: इनपुट के आधार पर टीम ने धनाऊ थाना क्षेत्र के भुणिया गांव की 'नत्थी बेरी' में रहने वाले हेमाराम विश्नोई के खेत पर बने एक कमरे में छापेमारी की।
- केमिकल बरामद: कमरे की तलाशी के दौरान प्लास्टिक के ड्रम में भरा भारी मात्रा में संदिग्ध केमिकल मिला। पूछताछ में आरोपियों ने इसे एमडी बनाने का मुख्य केमिकल '2-ब्रोमो-4-मिथाइलप्रोपियोफिनोन' होना स्वीकार किया।
- जब्ती: पुलिस ने ड्रम सहित कुल 42.660 किलोग्राम केमिकल और तस्करी में प्रयुक्त किया कार (RJ 54 CA 2682) को जब्त कर लिया।
जोधपुर में खुली दूसरी परत: घर के भीतर चल रही थी लैब
बाड़मेर में पकड़े गए मुख्य आरोपी नारायणराम विश्नोई ने पूछताछ में एक और चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि उसने अपने पैतृक गांव जोधपुर के कापरड़ा थाना अंतर्गत रामड़ावास कलां स्थित घर में एमडी बनाने की पूरी यूनिट लगा रखी है, जहां ड्रग्स बनाने की प्रक्रिया वर्तमान में भी चालू है।
- तत्काल एक्शन: एएनटीएफ ने तुरंत स्थानीय कापरड़ा पुलिस को अलर्ट किया और रामड़ावास कलां में नारायणराम के मकान पर धावा बोला।
- केमिकल और उपकरणों का जखीरा: तलाशी के दौरान कमरे से एमडी बनाने के काम आने वाले घातक केमिकल—डाइक्लोरोमीथेन (2.5 लीटर की 4 कांच की बोतलें), एम्पलूरा एसीटोन (2.5 लीटर की 1 बोतल), मिथाइलअमीन सॉल्यूशन (500 एमएल की 1 बोतल), एक सफेद टंकी में भरा मिश्रित घोल और अन्य तरल पदार्थ सहित ड्रग्स बनाने के वैज्ञानिक उपकरण बरामद किए गए।
चार दोस्तों की कहानी: कर्ज चुकाने के लिए बने ड्रग्स माफिया
इस पूरे नेटवर्क के पीछे राजस्थान और मध्य प्रदेश के तस्करों का एक शातिर गठजोड़ था। इसकी शुरुआत कुछ इस तरह हुई:
- बेंगलुरु में दोस्ती: जोधपुर का रहने वाला आरोपी नारायणराम मजदूरी करने बेंगलुरु गया था। वहां स्टील और फर्नीचर की दुकान पर काम करने के दौरान उसकी मुलाकात मध्य प्रदेश के प्रेमसिंह, विजयपाल और सुमेर सिंह से हुई। ये चारों वहां मिलकर नशा करने लगे। इसी दौरान एमपी के दोस्तों ने बताया कि वे एमडी बनाने का तरीका जानते हैं।
- शादी, नशा और कर्ज: नारायणराम वापस गांव आया, शादी की, लेकिन नशे की लत के कारण खुद के और पत्नी के गहने तक बेच दिए। वह लाखों के कर्ज में डूब गया।
- शेयर मार्केट का झटका: नारायणराम का दोस्त अशोक भी नशे का आदी था। उसने पैसा डबल करने के चक्कर में शेयर मार्केट में निवेश किया, लेकिन वहां भी भारी घाटा हुआ और वह भी कर्जदार हो गया।
- जहर का बिजनेस: कर्ज से उबरने और रातों-रात मोटी कमाई करने के लिए नारायणराम और अशोक ने बेंगलुरु वाले दोस्तों से संपर्क साधा और उन्हें पूरी प्लानिंग के साथ जोधपुर बुला लिया।
यूट्यूब से सीखा फॉर्मूला, 'खराब क्वालिटी' के चक्कर में चढ़े हत्थे
आरोपी पढ़ाई-लिखाई में कमजोर थे, इसलिए उन्होंने एमडी बनाने का सटीक फॉर्मूला सीखने के लिए इंटरनेट और यूट्यूब (YouTube) का सहारा लिया। लेकिन, अधकचरे ज्ञान के कारण वे जब भी एमडी बनाने का प्रयास करते, केमिकल जल जाता था।
- विवाद और जाल: बार-बार नाकाम होने पर ग्रुप के 'केमिस्ट' विजयपाल और प्रेमसिंह ने कहा कि सप्लायर ने जो 'ब्रोमो' केमिकल दिया है, उसकी क्वालिटी खराब है। वे इस खराब माल को वापस लौटाकर अपने पैसे लेने के लिए बाड़मेर में हेमाराम के खेत पर पहुंचे थे और सप्लायर का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान एएनटीएफ ने घेराबंदी कर इन्हें रंगे हाथों दबोच लिया।
टीम का बंटा ढांचा: किसे क्या जिम्मेदारी मिली थी?
इस गिरोह ने बाकायदा कॉर्पोरेट स्टाइल में काम का बंटवारा कर रखा था:
- नारायणराम विश्नोई (जोधपुर): पूरे गैंग का मुख्य समन्यवक (कोऑर्डिनेटर) था, जिसने सबको एकजुट किया।
- अशोक कुमार (जालौर): ड्रग्स बनाने के लिए कच्चे माल और प्रिकर्सर केमिकल की व्यवस्था करने वाला सप्लायर।
- प्रेम सिंह व विजयपाल सिंह (मध्य प्रदेश): ये दोनों केमिकल के जानकार और एमडी बनाने के 'एक्सपर्ट' थे।
- हेमाराम विश्नोई (बाड़मेर): केमिकल घटकों की जानकारी रखता था और सुरक्षित ठिकाना (खेत) मुहैया कराता था।
- सुमेर सिंह (मध्य प्रदेश): इसे ड्रग्स फैक्ट्री का 'मैनेजर' बनाया गया था, जो व्यवस्थाएं देखता था।
गिरफ्तार आरोपियों की कुंडली
- नारायणराम (30 वर्ष): पुत्र सूरजराम विश्नोई, निवासी रामड़ावास कलां, पीपाड़, जोधपुर ग्रामीण।
- अशोक कुमार (25 वर्ष): पुत्र हनुमानराम विश्नोई, निवासी कैरिया, चितलवाना, जिला जालौर।
- सुमेर सिंह (29 वर्ष): पुत्र भगवान सिंह राजपूत, निवासी बरखेड़ा जयसिंह, पिपलिया मंडी, मध्य प्रदेश।
- प्रेम सिंह (29 वर्ष): पुत्र फूंदा सिंह राजपूत, निवासी जमालपुरा, वाईडी नगर, जिला मंदसौर, मध्य प्रदेश।
- विजयपाल सिंह (20 वर्ष): पुत्र नागू सिंह राजपूत, निवासी कुम्हारी, रिंगनोद, जिला रतलाम, मध्य प्रदेश।
- हेमाराम (40 वर्ष): पुत्र हमीरा राम विश्नोई, निवासी नत्थी बेरी, धनाऊ, जिला बाड़मेर।
एएनटीएफ की अपील: आप दें सूचना, नाम रहेगा गुप्त
पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार ने आमजन से अपील की है कि यदि उनके आस-पास कोई भी नशा तस्करी, अवैध फैक्ट्रियों या अपराधियों से जुड़ी गतिविधि दिखे, तो तुरंत एएनटीएफ के कंट्रोल रूम नंबर 0141-2502877 या व्हाट्सएप नंबर 9261225056 पर सूचना दें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। उत्कृष्ट कार्य करने वाली पुलिस टीम को मुख्यालय पर विशेष कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा।







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