‘सिर साटे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण’ के जयघोष से गूंजा भीनमाल, विश्व के सबसे बड़े पर्यावरण सम्मेलन में शामिल होंगे क्षेत्र के जांबाज
सर्किल न्यूज़ नेटवर्क
भीनमाल। राजस्थान की जीवनरेखा और राज्य वृक्ष ‘खेजड़ी’ के अस्तित्व को बचाने के लिए अब रणभेरी बज चुकी है। सोमवार को भीनमाल क्षेत्र से एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जब हजारों की संख्या में समाज बंधु, पर्यावरण प्रेमी और युवा बसों व निजी वाहनों के काफिलों के साथ बीकानेर महासम्मेलन के लिए रवाना हुए।
पर्यावरण प्रेमियों का महाकुंभ
बीकानेर के डूंगर कॉलेज मैदान में आयोजित होने जा रहा यह महासम्मेलन विश्व का सबसे बड़ा पर्यावरण प्रेमियों का जमावड़ा माना जा रहा है। भीनमाल, बागोड़ा, पुनासा, विरार नाड़ी, भालनी, कुकावास, जैलातरा, दांतीवास, सेवड़ी, वाड़ा भाडवी, नया वाड़ा, जोगाऊ, थोबाऊ, बासड़ा धनजी, हापु की ढाणी भालनी और डुगरवा सहित दर्जनों गांवों से पर्यावरण रक्षक इस मुहिम का हिस्सा बनने निकले हैं।
अमृता देवी का बलिदान बना प्रेरणा
इस मौके पर एडवोकेट श्रवण ढाका ने मां अमृता देवी विश्नोई के बलिदान को याद करते हुए भावुक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “सिर साटे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण” यह महज पंक्तियाँ नहीं, बल्कि हमारी रगों में दौड़ने वाला संकल्प है। आंदोलन का मुख्य उद्देश्य खेजड़ी के संरक्षण के लिए सरकार से कठोर कानून बनाने की मांग करना और मरुस्थल को रेगिस्तान बनने से रोकना है।
इन प्रमुख चेहरों ने संभाली कमान
रवानगी के दौरान विश्नोई युवा संगठन जालोर के जिला अध्यक्ष एडवोकेट श्रवण ढाका, महासभा युवा अध्यक्ष डॉ. दिनेश जाभाणी, बाबूलाल भालनी, श्री रामकिशन खिलेरी (वाड़ा भाडवी), पूनमचंद सियाग, भिखाराम, राजपाल माजु और गोपी साऊ सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नेतृत्व किया।
सरकार से सख्त कानून की मांग
समाज के प्रतिनिधियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह आंदोलन पूर्णतः शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है। हमारा मकसद सिर्फ इतना है कि सरकार खेजड़ी को काटने वालों के खिलाफ ठोस और प्रभावी कानून बनाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को हम एक हरा-भरा और सुरक्षित राजस्थान सौंप सकें।



