रानीवाड़ा की मारवाड़ी पट्टी में क्षत्रिय घांची समाज ने समाज सुधार और नशामुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें 22 गांवों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में कई अहम प्रस्ताव पारित किए गए, जिनका उद्देश्य सामाजिक अनुशासन को मजबूत करना और स्वस्थ परंपराओं को बढ़ावा देना था। प्रस्तावों के तहत मृत्युभोज में मिठाई, शीरा और मीठा खाना पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया गया, ताकि अनावश्यक खर्च और रूढ़ियों को समाप्त किया जा सके। इसके अलावा, शादी-ब्याह, जागरण और अन्य आयोजनों में डोडा-अफीम की मनुहार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की गई, जिससे नशामुक्त समाज की दिशा में प्रभावी कदम बढ़ाया जा सके।

मृत्यु होने पर समाज में शोक की अवधि 21 दिन निर्धारित की गई, जिसके बाद परिवार त्योहार मना सकता है, ताकि जीवन के सामान्य प्रवाह को बनाए रखा जा सके। मृत्यु वाले घर पर आने वालों को सिर टोपी या लुंगी से ढंककर आने का नियम बनाया गया, और गले में लुंगी लटकाने की प्रथा समाप्त करने पर जोर दिया गया। शादी समारोह में हल्दी रस्म पूरी तरह बंद करने का निर्णय भी लिया गया, जिससे अनावश्यक खर्च और जटिलताओं से बचा जा सके।
इसके अतिरिक्त, बिंद राजा (दूल्हा) को दाढ़ी न रखने का निर्देश दिया गया, और समाज के नियमों को न मानने वाले व्यक्तियों पर 51 हजार रुपये का दंड लगाया गया, जिसे सांवलाजी भगवान में भरना अनिवार्य होगा। इस बैठक में समाज के वरिष्ठ सदस्य बगदाराम घांची धानोल ने प्रस्तावों को पढ़कर सुनाया, जिसे सभी ने सहमति के साथ स्वीकार किया। यह निर्णय न केवल समाज के अनुशासन को बनाए रखने में मदद करेगा, बल्कि नशामुक्त और सुव्यवस्थित समाज की ओर भी एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

यह पहल समाज को नई दिशा देने के साथ-साथ सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास है। इससे समाज में सुधार की प्रक्रिया तेज होगी, और आने वाली पीढ़ियों को अनुशासन और नैतिक मूल्यों की सही दिशा मिलेगी।







पाठक टिप्पणियां (Comments)
0 टिप्पणियां