राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ के न्यायमूर्ति कुलदीप माथुर ने बीकानेर जिले की विभिन्न प्राथमिक दूध उत्पादक सहकारी समितियों के मामले में एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। न्यायालय ने सहकारी विभाग द्वारा समितियों में प्रशासक नियुक्त करने के निर्णय पर रोक लगा दी है।
क्या है पूरा मामला?
नोपाराम, कालेश्वरी, श्रीराम और राजा खातून सहित कुल 9 चेयरमैनों ने हाईकोर्ट में सिविल रिट याचिका (संख्या 8560/2026) दायर की थी। याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि:
- याचिकाकर्ता दूध उत्पादक सहकारी समितियों के अध्यक्ष पदों पर कार्यरत थे।
- कार्यकाल पूरा होने पर उन्होंने समय रहते चुनाव कराने का अनुरोध किया था।
- लेकिन, सहकारिता विभाग ने बिना किसी वैध कारण के चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं की।
- विभाग ने उल्टा कदम उठाते हुए निर्वाचित अध्यक्षों को हटाकर वहां सरकारी प्रशासक (Administrators) नियुक्त करने का निर्णय ले लिया।
हाईकोर्ट का सख्त रुख
अदालत ने माना कि चुनाव में देरी के लिए याचिकाकर्ता जिम्मेदार नहीं हैं, ऐसी स्थिति में प्रशासकों की नियुक्ति का निर्णय मनमाना प्रतीत होता है। न्यायमूर्ति कुलदीप माथुर ने आदेश दिया कि:
- प्रशासकों पर रोक: अगली सुनवाई तक सहकारिता विभाग उन समितियों में प्रशासक नियुक्त नहीं कर सकेगा जिनका कार्यकाल समाप्त हो चुका है।
- नोटिस जारी: अदालत ने राज्य सरकार और सहकारिता विभाग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
- चुनाव की अनुमति: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विभाग इस दौरान सहकारी समितियों में चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए स्वतंत्र है।
इस फैसले से बीकानेर क्षेत्र की सहकारी समितियों के निर्वाचित प्रतिनिधियों को बड़ी राहत मिली है, जो विभाग की कार्यशैली को "अवैध" बताकर विरोध कर रहे थे।







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