बड़ी लापरवाही: 2 घंटे देरी से पहुंची दमकल, धू-धू कर जला करोड़ों का ट्रांसफार्मर; 3 दिनों तक अंधेरे के साये में रहेंगे ग्रामीण।
सांचौर/जाखड़ी। सांचौर के जाखड़ी जीएसएस (GSS) पर शुक्रवार को प्रकृति और तकनीक के तालमेल में लगी एक चिंगारी ने विकराल रूप ले लिया। सौर ऊर्जा सप्लाई के दौरान हुए एक जोरदार शॉर्ट सर्किट ने देखते ही देखते पूरे पावर हाउस को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी भीषण थी कि पावर हाउस के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से, 'विशालकाय ट्रांसफार्मर' को बुरी तरह झुलસા दिया।
शॉर्ट सर्किट से 'बम' की तरह फटा रेडिएटर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगते ही ट्रांसफार्मर के रेडिएटर में बड़े छेद हो गए, जिससे उबलता हुआ तेल रिसाव की तरह बहने लगा। तेल ने आग में घी का काम किया और लपटें आसमान छूने लगीं। करोड़ों की मशीनरी मिनटों में खाक हो गई। यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं होता, तो बड़ा धमाका हो सकता था, जिससे आसपास के क्षेत्र में जान-माल का बड़ा नुकसान संभव था।
व्यवस्था की पोल: 2 घंटे बाद पहुंची दमकल
इस भीषण घटना ने आपदा प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी है। सूचना देने के बावजूद सांचौर से दमकल की गाड़ी 2 घंटे की देरी से मौके पर पहुंची। तब तक आग ट्रांसफार्मर को पूरी तरह 'फेल' कर चुकी थी। ग्रामीणों में इस देरी को लेकर भारी रोष है।
अंधेरे की 'जेल' में पूरा गांव: 3 दिन तक नहीं आएगी बिजली
हादसे के बाद जाखड़ी और आसपास के गांवों की बिजली सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है। घर, स्कूल और अस्पताल सब अंधेरे में डूबे हैं।
XEN भरत देवड़ा ने बताया: "जले हुए ट्रांसफार्मर की जांच रिपोर्ट आला अधिकारियों को भेज दी गई है। कल जोधपुर से नया ट्रांसफार्मर रवाना होगा, जिसे यहां लाकर इंस्टाल करने और चार्ज करने में 2 से 3 दिन का समय लगेगा।"
सर्किल न्यूज का सवाल: क्या इतने महत्वपूर्ण जीएसएस पर दमकल यंत्रों की व्यवस्था नहीं थी? और अगर थी, तो दमकल के आने का इंतजार क्यों करना पड़ा? तीन दिनों तक अंधेरे में रहने वाली जनता की तकलीफ का जिम्मेदार कौन?
प्रशासनिक हलचल: बिजली विभाग के कर्मचारी युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य में जुटे हैं, लेकिन फिलहाल ग्रामीणों को मोमबत्तियों और टॉर्च के सहारे ही रातें काटनी होंगी।







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