हुंकार: मांगों पर अड़ा अन्नदाता, ट्रैक्टर रैली निकाल दिखाई अपनी ताकत; प्रशासन ने घुटने टेके, मिला ठोस कार्रवाई का आश्वासन
जसवंतपुरा। सड़कों पर गूंजती ट्रैक्टरों की गडगडाहट, हाथों में लहराते किसान यूनियन के झंडे और आंखों में अपने हक को पाने का अडिग संकल्प! आज जसवंतपुरा की फिजां में कुछ ऐसा ही नजारा था। अपनी वाजिब मांगों को लेकर भारतीय किसान संगठन ने वो कर दिखाया, जिसने शासन और प्रशासन की नींद उडा दी है। अनिश्चितकालीन धरने के बीच निकली इस विशाल ट्रैक्टर रैली ने हुकूमत को सीधा संदेश दे दिया है कि अब किसान झुकने वाला नहीं है।
ट्रैक्टर पर सवार हुए जननायक: रतन देवासी ने कहा- अधिकार लेकर रहेंगे
इस आंदोलन की सबसे बडी ताकत बने रानीवाडा विधायक रतन देवासी, जो प्रोटोकॉल छोड खुद किसानों के साथ ट्रैक्टर पर सवार होकर रैली की अगुवाई करने उतरे। विधायक देवासी ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसानों की मांगें कोई भीख नहीं, उनका हक हैं। उन्होंने प्रशासन को चेताते हुए कहा कि अब खोखले आश्वासनों का वक्त निकल चुका है, अब जमीन पर ठोस कार्रवाई चाहिए। किसानों के मान-सम्मान और हितों से कोई समझौता नहीं होगा।
देवल की दहाड: कागजी घोड़े दौडाना बंद करे प्रशासन
वहीं, पूर्व विधायक नारायण सिंह देवल ने भी मोर्चे पर डटकर प्रशासन की घेराबंदी की। देवल ने अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़े प्रहार करते हुए कहा कि अधिकारी फाइलों में दौडाए जाने वाले घोड़ों को रोकें और हकीकत में किसानों की सुध लें। उन्होंने चेतावनी दी कि किसान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है और किसी भी ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
क्यों सुलग रही है आक्रोश की आग?
यह गुस्सा रातों-रात नहीं उपजा है, बल्कि लंबे समय से अनदेखी का नतीजा है। क्षेत्र का किसान मुख्य रूप से इन समस्याओं से जूझ रहा है:
- नर्मदा नहर: पानी के समान वितरण की मांग।
- बिजली संकट: आपूर्ति में सुधार की दरकार।
- मुआवजा: फसलों के नुकसान की भरपाई।
बार-बार ज्ञापन देने के बाद भी जब नतीजा 'सिफर' रहा, तो आज जसवंतपुरा की सड़कों पर किसानों का सैलाब उमड पडा।
अंतिम चेतावनी: धरना सिर्फ 'स्थगित' है, 'समाप्त' नहीं
किसानों के भारी दबाव को देखते हुए प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर दौडे आए। विधायक रतन देवासी और नारायण सिंह देवल की मौजूदगी में घंटों चली वार्ता के बाद अधिकारियों ने समाधान का भरोसा दिलाया। लेकिन किसान संगठन ने कड़े लहजे में साफ कर दिया है कि यह आंदोलन सिर्फ 'स्थगित' किया गया है। अगर तय समय में वादे पूरे नहीं हुए, तो अगली बार आंदोलन का स्वरूप इससे भी भीषण होगा।
जसवंतपुरा में किसानों की इस एकजुटता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब अन्नदाता जागता है, तो सिंहासन डोलने लगते हैं।







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