डॉ. भाटी बने महिलाओं के लिए ‘वरदान’, नॉर्मल डिलीवरी कराकर जगाई उम्मीद
सिरोही/माउंट आबू। आधुनिक चिकित्सा के इस दौर में जहां सिजेरियन डिलीवरी एक आम बात हो गई है, वहीं कुछ ऐसे डॉक्टर भी हैं जो अपनी विशेषज्ञता और अनुभव से महिलाओं की उम्मीदों को नया जीवन दे रहे हैं। ऐसे ही एक चिकित्सक हैं डॉ. भाटी, जिन्होंने अपनी असाधारण काबिलियत से न सिर्फ कई महिलाओं को नॉर्मल डिलीवरी का सुख दिया, बल्कि चिकित्सा जगत में मानवता का एक बेहतरीन उदाहरण भी पेश किया है। जहां कई बड़े अस्पतालों के डॉक्टरों ने सिजेरियन ऑपरेशन को अनिवार्य बताया, वहीं डॉ. भाटी ने इन सभी मामलों में सफल नॉर्मल डिलीवरी कराकर यह साबित कर दिया कि सही दिशा और सटीक उपचार से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। उनकी यह सफलताएं उन सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा हैं, जो सिजेरियन के भय से ग्रस्त हैं।
मरीजों की सफल कहानियां

तीजा कुँवर की कहानी: माउंट आबू से सिरोही तक की सफल यात्रा
माउंट आबू के देलवाड़ा निवासी श्री चंदन सिंह राजपूत की पत्नी तीजा कुँवर को आबूरोड हॉस्पिटल में सिजेरियन डिलीवरी की सलाह दी गई थी। परिवार चिंतित था और प्राकृतिक प्रसव की उम्मीद खो चुका था। लेकिन, जब उन्होंने डॉ. भाटी से संपर्क किया, तो उम्मीद की एक नई किरण जगी। डॉ. भाटी ने तीजा कुँवर की रिपोर्ट का गहन अध्ययन किया और उन्हें नॉर्मल डिलीवरी का आश्वासन दिया। उनकी विशेषज्ञता और अनुभव से कुछ ही समय में तीजा कुँवर ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। यह न सिर्फ चिकित्सा की जीत थी, बल्कि डॉ. भाटी के उस विश्वास की भी जीत थी कि सही मार्गदर्शन और धैर्य से प्राकृतिक प्रसव संभव है।
होजी देवी की कहानी: वीर झाड़ोली से सिरोही तक राहत की सांस
वीर झाड़ोली की निवासी होजी देवी, पत्नी नवाराम चौधरी, को सिरोही हॉस्पिटल में सिजेरियन ऑपरेशन के लिए कहा गया था। इस खबर से परिवार सदमे में था। उन्होंने डॉ. भाटी के बारे में सुना और उनसे मिलने का फैसला किया। डॉ. भाटी ने उनकी रिपोर्ट देखी और तुरंत उन्हें भरोसा दिलाया कि नॉर्मल डिलीवरी संभव है। उनके आश्वासन ने परिवार को बड़ी राहत दी। डॉक्टर की देखरेख में कुछ ही मिनटों में होजी देवी ने सामान्य प्रसव से बच्चे को जन्म दिया। इस घटना ने न सिर्फ होजी देवी और उनके परिवार को खुशी दी, बल्कि डॉ. भाटी की मानवता और उनकी चिकित्सा विशेषज्ञता को भी उजागर किया।
जोशना कुमारी की कहानी: कैलाश नगर से उम्मीदों की उड़ान
कैलाश नगर निवासी जोशना कुमारी, पत्नी जितेंद्र कुमार माली, के लिए यह डिलीवरी किसी चमत्कार से कम नहीं थी। उनका पहला प्रसव सिजेरियन ऑपरेशन से हुआ था और उनका वजन भी 80 किलो से अधिक था। बड़े-बड़े अस्पतालों के डॉक्टरों ने स्पष्ट कह दिया था कि इस बार भी सिजेरियन ही एकमात्र विकल्प है। लेकिन, डॉ. भाटी ने इस चुनौती को स्वीकार किया। अपनी कुशलता और आत्मविश्वास से उन्होंने न सिर्फ जोशना कुमारी को नॉर्मल डिलीवरी का भरोसा दिलाया, बल्कि उसे सफलतापूर्वक अंजाम भी दिया। यह केस डॉ. भाटी की असाधारण योग्यता का प्रमाण है, जिन्होंने चिकित्सा की सीमाओं से परे जाकर मरीज के लिए सबसे बेहतर विकल्प चुना।
जोशना कुँवर की कहानी: सायला से नॉर्मल डिलीवरी का सपना
सायला निवासी जोशना कुँवर, पत्नी सूर सिंह राजपूत, का पहला प्रसव भी सिजेरियन से हुआ था। इस बार वह नॉर्मल डिलीवरी चाहती थीं, लेकिन उन्हें इसकी बहुत कम उम्मीद थी। इसी आशा में वह डॉ. भाटी के पास पहुंचीं। डॉ. भाटी ने उनकी पूरी स्थिति को समझा और उन्हें प्रोत्साहित किया। उनकी देखरेख में जोशना कुँवर का सपना साकार हुआ। डॉ. भाटी ने सफलतापूर्वक नॉर्मल डिलीवरी करवाई, जिससे न सिर्फ परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा, बल्कि उन महिलाओं को भी प्रेरणा मिली जो पहले सिजेरियन के बाद नॉर्मल डिलीवरी की उम्मीद छोड़ देती हैं।
लक्ष्मी कुँवर की कहानी: आबूराज से 5 मिनट में मिली खुशी
आबूराज निवासी लक्ष्मी कुँवर, पत्नी श्री गोविंद सिंह राजपूत, को आबूरोड हॉस्पिटल में सिजेरियन डिलीवरी के लिए कहा गया था। इससे घबराकर उन्होंने डॉ. भाटी से संपर्क किया। डॉ. भाटी ने उनकी स्थिति को समझा और बिना समय गवाए प्रसव की प्रक्रिया शुरू की। अपनी त्वरित और सटीक चिकित्सा से उन्होंने सिर्फ 5 मिनट में नॉर्मल डिलीवरी करवा दी, जिससे परिवार को एक बड़ी राहत मिली। यह डॉ. भाटी की असाधारण कार्यकुशलता और निर्णायक क्षमता का परिचायक है, जिन्होंने आपात स्थिति में भी धैर्यपूर्वक सबसे सही निर्णय लिया।



