बिना सुविधाओं के सरकारी स्कूल की छात्रा ने आर्ट्स में हासिल किए 98.80% अंक; चार विषयों में 100 में से 100 नंबर लाकर सबको चौंकाया
बागोड़ा/जालोर। कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और हौसलों में उड़ान हो, तो गरीबी और अभाव कभी तरक्की का रास्ता नहीं रोक सकते। इसे सच कर दिखाया है जालोर जिले के बागोड़ा उपखण्ड क्षेत्र के एक छोटे से गांव जूनी बाली की बेटी डिम्पल कुमारी ने। डिम्पल ने राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं कला वर्ग (Arts) की परीक्षा में 98.80% अंक प्राप्त कर न केवल अपने माता-पिता का मान बढ़ाया, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है।
भैंसों की चाकरी और दूध दोहन के बीच की पढ़ाई
डिम्पल की यह सफलता इसलिए खास है क्योंकि उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा है। एक अत्यंत साधारण और रूढ़िवादी परिवार से ताल्लुक रखने वाली डिम्पल सुबह उठकर घर की सफाई, झाड़ू-पोछा और पशुपालन जैसे कार्यों में अपनी मां का हाथ बंटाती हैं। मवेशियों को चारा डालना और दूध निकालने के बाद जो समय मिलता, उसे डिम्पल अपनी किताबों के नाम कर देती थीं।
दिहाड़ी मजदूर पिता ने रूढ़ियों को दी चुनौती
डिम्पल के पिता गुलाबारम सुथार एक दिहाड़ी मजदूर हैं जो खेती-बाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। एक ऐसे परिवेश में जहाँ आज भी बालिकाओं की शिक्षा को लेकर समाज में हिचकिचाहट रहती है, वहां गुलाबारम और मां सोरम देवी ने समाज की परवाह न करते हुए अपनी बेटी को पढ़ने के लिए प्रेरित किया। गांव में बिजली की अनियमित कटौती और संसाधनों की कमी के बावजूद डिम्पल ने अपनी मेहनत जारी रखी।
विषयवार प्रदर्शन: चार विषयों में 'शत-प्रतिशत' अंक
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, जूनी बाली की इस होनहार छात्रा ने अपनी अंकतालिका से सबको हैरान कर दिया है। डिम्पल ने कुल 500 में से 494 अंक प्राप्त किए हैं। उनका स्कोरकार्ड कुछ इस प्रकार रहा:
- इतिहास: 100/100
- भूगोल: 100/100
- अंग्रेजी (अनिवार्य): 100/100
- राजनीति विज्ञान: 100/100
- हिन्दी (अनिवार्य): 94/100
क्षेत्र में खुशी की लहर
एक सरकारी स्कूल की छात्रा द्वारा निजी स्कूलों को पछाड़ते हुए इस तरह का उत्कृष्ट प्रदर्शन करना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बना हुआ है। डिम्पल की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर स्कूल प्रशासन और ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर खुशी जताई। डिम्पल का कहना है कि वह भविष्य में उच्च शिक्षा प्राप्त कर देश की सेवा करना चाहती हैं। उनकी यह कहानी उन हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा है जो सुविधाओं के अभाव में अपने सपनों को दम तोड़ने देती हैं।







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