बीच के स्टेशनों के यात्रियों को राहत देने के लिए नियमों के सरलीकरण और पारदर्शिता का दिया सुझाव
पिंडवाड़ा (सिरोही)। भारतीय रेलवे की रिजर्वेशन कोटा प्रणाली में विसंगतियों के कारण बीच के स्टेशनों के यात्रियों को होने वाली परेशानियों को लेकर पूर्व डीआरयूसीसी (DRUCC) सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता काशीराम रावल ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार को पत्र भेजकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। रावल ने रेलवे टिकट बुकिंग में जनरल (GN), रिमोट लोकेशन (RL) और पूल्ड कोटा (PQ) के नियमों को सरल और पारदर्शी बनाने की मांग की है। पत्र में प्रमुख रूप से निम्नलिखित सुझाव दिए गए हैं:

- खाली सीटों का हो डायनामिक यूटिलाइजेशन: मुख्य स्टेशन से जनरल कोटे (GN) की सीटें खाली रहने पर उन्हें स्वतः ही रिमोट लोकेशन (RLWL) और पूल्ड कोटे (PQWL) की लंबी वेटिंग लिस्ट को कन्फर्म करने के लिए ट्रांसफर किया जाना चाहिए, ताकि सीटें खाली न जाएं और यात्रियों को राहत मिले।
- बुकिंग समय के आधार पर मिले कन्फर्मेशन: अक्सर बाद में बुक हुई जनरल वेटिंग पहले कन्फर्म हो जाती है, जबकि पहले की गई RLWL या PQWL की कम नंबर की वेटिंग भी अटक जाती है। चार्टिंग के समय बची हुई सीटों को कोटे के बजाय बुकिंग समय (टाइम स्टैम्प) की वरिष्ठता के आधार पर क्लियर किया जाए।
- मध्यवर्ती स्टेशनों को मिले आरएसी में हिस्सेदारी: अधिकांश ट्रेनों में आरएसी सीटें केवल मुख्य स्टेशनों के यात्रियों को मिलती हैं। लंबी दूरी की ट्रेनों में प्रमुख रिमोट लोकेशन स्टेशनों के लिए भी आरएसी का 20 से 30 प्रतिशत कोटा तय होना चाहिए, ताकि बीच के स्टेशनों के यात्रियों को भी बैठने की जगह मिल सके।
- ऐप पर दिखे कन्फर्मेशन की सटीक जानकारी: आईआरसीटीसी ऐप पर दिखने वाला 'कन्फर्मेशन प्रोबेबिलिटी' का प्रतिशत कई बार भ्रामक होता है। रेलवे के सॉफ्टवेयर (CRIS) को अपग्रेड कर पिछले 6 महीनों के ट्रेंड के आधार पर यात्रियों को क्लियर होने का वास्तविक इतिहास और सटीक डेटा दिखाया जाए।
- करंत बुकिंग सिस्टम पर लाइव दिखे डेटा: चार्ट बनने के बाद खाली बची सीटों का डेटा तुरंत आईआरसीटीसी के करंट बुकिंग सिस्टम पर लाइव होना चाहिए, जिससे बीच के स्टेशनों के यात्री ट्रेन आने से 30 मिनट पहले तक करंट टिकट बुक कर सकें।
रावल ने पत्र में उम्मीद जताई है कि बुनियादी ढांचे के साथ-साथ इन कमर्शियल नियमों में यात्री-अनुकूल सुधार करने से मध्यवर्ती और छोटे शहरों के नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी।







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