राजस्थान में चारागाह, तालाब और गौचर भूमि को भू-माफियाओं के चंगुल से छुड़ाने के लिए सरकार ने अपनी रणनीति आक्रामक कर दी है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने प्रदेश के सभी जिलों से सबसे ज्यादा अतिक्रमण करने वाले 10-10 व्यक्तियों की सूची नामजद मांगी है। सर्कल न्यूज़ नेटवर्क की इस विशेष रिपोर्ट में जानिए कि कैसे सरकार अब 'एक्शन मोड' में आ चुकी है।
1. 2017 के निर्देशों की अब होगी सख्ती से पालना
आपको बता दें कि चारागाह विकास और अतिक्रमण मुक्त भूमि के लिए प्रशासनिक सुधार विभाग ने 31 जुलाई 2017 को ही विशेष आदेश जारी किए थे। उस समय जिला प्रमुख की अध्यक्षता में जिला स्तरीय बंजर भूमि एवं चारागाह विकास समिति का गठन किया गया था, लेकिन अब उन पुराने निर्देशों को धरातल पर उतारने के लिए वर्तमान सरकार ने अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दी है।
2. जिले की टॉप 10 ग्राम पंचायतों और अतिक्रमणकारियों की बनेगी सूची
सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक जिले से उन सर्वाधिक अतिक्रमित 10 ग्राम पंचायतों की सूची तैयार की जाए जहां सबसे ज्यादा भूमि पर कब्जा है। इसके साथ ही, जिला स्तर पर उन 10 व्यक्तियों के नाम भी मांगे गए हैं जिन्होंने सर्वाधिक क्षेत्रफल में अतिक्रमण किया है। अब इन रसूखदारों का नाम विभाग की वेबसाइट पर सार्वजनिक होने की भी संभावना है।

3. 'वार्डपंच' की अध्यक्षता में बनेगी विशेष कमेटी
अतिक्रमण रोकने के लिए राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 170 के तहत अब हर गांव में पांच व्यक्तियों की एक समिति काम करेगी।
- अध्यक्ष: संबंधित गांव का वार्ड पंच।
- सदस्य: चार सदस्य जो ग्राम सभा द्वारा निर्वाचित होंगे।
- कार्य: चारागाह भूमि का नियंत्रण करना और अतिक्रमण रोकना।
4. सरकार की मंशा: ओरण और खेजड़ी आंदोलनों का असर
राजस्थान के लोक जीवन में ओरण (देव वन) और गौचर का विशेष महत्व है। हालिया ओरण बचाओ आंदोलनों और खेजड़ी के प्रति बढ़ती जागरूकता ने सरकार पर दबाव बनाया है कि वे इन सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा करें। सरकार की वर्तमान सक्रियता यह दर्शाती है कि वह अब स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को बचाने के लिए कड़े कानूनी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।
5. रिपोर्ट का अल्टीमेटम और निर्देश देने वाले अधिकारी
अतिक्रमण की यह रिपोर्ट अविलंब (बिना किसी देरी के) विभाग को भिजवाने के निर्देश दिए गए हैं। समीक्षा बैठक के बाद अधिकारियों को 'आज ही' जानकारी भेजने का टारगेट दिया गया है।
निर्देश जारी करने वाले प्रमुख अधिकारी:
- भारत भूषण गोयल: उप शासन सचिव, जिन्होंने 29 दिसंबर 2025 को अतिक्रमण चिन्हित करने के आदेश जारी किए।
- इन्द्रजीत सिंह: उपायुक्त एवं उपशासन सचिव, जिन्होंने 22 जुलाई 2025 को चरागाह समिति को क्रियाशील करने और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पर जोर दिया।
6. क्या है सरकार का अगला टारगेट?
सरकार का मुख्य लक्ष्य केवल कागजी कार्यवाही नहीं, बल्कि वास्तविक रूप से बेदखली है। यदि कोई पंचायत अतिक्रमण हटाने में ढिलाई बरतती है, तो सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी को इसकी सीधी जिम्मेदारी लेनी होगी। पुलिस की सहायता लेकर और तहसीलदार के जरिए भारी जुर्माना वसूल कर इस भूमि को वापस पंचायत निधि में शामिल करने की योजना है।
विशेष नोट: ग्राम विकास अधिकारियों से अब इस संबंध में लिखित शपथ पत्र भी लिया जाएगा कि उनके क्षेत्र में सर्वेक्षण पूरा हो चुका है।







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