बनासकांठा (पालनपुर)। बालाराम अंबाजी अभयारण्य क्षेत्र में दुर्लभ वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग ने एक अहम कार्रवाई को अंजाम दिया है। अमीरगढ़ रेंज की वन टीम ने जंगल सर्वे नंबर 158 के पास दो व्यक्तियों को अवैध रूप से गोह (घो - बंगाल मॉनिटर) का शिकार करते हुए रंगे हाथों पकड़ा। पकड़े गए आरोपियों की पहचान सुरजकुमार लखनभाई सोलंकी और रविभाई अर्जुनभाई पडियार के रूप में हुई है, जो पालनपुर के मानसरोवर बाबरीवास क्षेत्र के निवासी हैं।

जानकारी के अनुसार, नायब वन संरक्षक वन्यजीव बनासकांठा और सहायक वन संरक्षक के निर्देशन में वन कर्मचारियों की टीम गश्त कर रही थी, तभी दोनों आरोपियों को दो जीवित घोंघों को थैले में भरकर ले जाते हुए पकड़ा गया। घोंघा एक संरक्षित वन्यजीव है और इसका शिकार करना कानूनन अपराध है।
वन विभाग ने दोनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धाराओं 2, 9, 50, 51 व 52 के तहत विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

इस कार्रवाई में सहायक वन संरक्षक महुलभाई प्रजापति, रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर महेन्द्रसिंह वाघेला, वनपाल जावेदखान घासुरा, वनरक्षक दिनेश चौधरी, पंकजकुमार छत्रालिया, कमलेश पुरोहित सहित विभागीय स्टाफ ने सक्रिय भूमिका निभाई। इसके अलावा SRP स्टाफ और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी अगरसिंह वाघेला और रवजीभाई रोटातर ने भी अभियान में सहभागिता की।
वन विभाग का यह कदम बंगाल मॉनिटर यानि गोह वन्यजीव तस्करी रोकने की दिशा में एक सख्त संदेश है। अधिकारियों ने बताया कि अभयारण्य क्षेत्र में गश्त और निगरानी और अधिक तेज़ की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

बंगाल मॉनिटर को IUCN रेड लिस्ट में "लीस्ट कंसर्न" (Least Concern) के रूप में वर्गीकृत किया गया है, लेकिन इसकी आबादी अवैध शिकार और आवास हानि के कारण घट रही है। इनके जननांगों को "हठा जोड़ी" के रूप में गलत तरीके से बेचा जाता है, जिसे तांत्रिक शक्तियों और औषधीय गुणों के लिए उपयोग किया जाता है। यह व्यापार भारत में अवैध है, क्योंकि यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत शेड्यूल-I में सूचीबद्ध है।

बंगाल मॉनिटर CITES (Convention on International Trade in Endangered Species) के Appendix I में सूचीबद्ध है, जो इसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर प्रतिबंध लगाता है। बंगाल मॉनिटर के बारे में कई मिथक और किंवदंतियां हैं। कुछ लोग मानते हैं कि इसका मांस खाने से अलौकिक शक्ति मिलती है, जबकि अन्य इसे खतरनाक मानते हैं। किंवदंती है कि मराठा सेनापति तानाजी मालुसरे ने सिंहगढ़ किले पर चढ़ने के लिए बंगाल मॉनिटर का उपयोग किया था। उनकी मजबूत पकड़ और पंजों की ताकत ने रस्सी और मानव के वजन को सहन करने में मदद की। इसे विभिन्न भाषाओं में अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे हिंदी में "गोह", मराठी में "घोरपड", तमिल में "उडुंबु", और बंगाली में "गोसाप"।







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