Circle News Network | जयपुर/नीमच
राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमा पर आतंक का दूसरा नाम बन चुका एक ऐसा अपराधी, जिसके नाम से ही कानून की रूह कांपती थी, आखिरकार कानून के लंबे हाथों की गिरफ्त में आ ही गया। यह कहानी है ‘ऑपरेशन नीलमिणि’ (Operation Neelmani) की, जिसमें नशा विरोधी दस्ते (ANTF) ने वह कर दिखाया जो अब तक नामुमकिन सा लग रहा था।
अति वांछित, अंतरराज्यीय कुख्यात तस्कर सुनील (27) पुत्र कालुलाल, निवासी गमेजीपुरा (जीरन, नीमच, मध्य प्रदेश) को ANTF ने एक फिल्मी पटकथा जैसी कार्रवाई में दबोच लिया। आईजी विकास कुमार के नेतृत्व में चली इस मुहिम ने साबित कर दिया कि नशा तस्कर चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, एक दिन उसे खाकी के सामने झुकना ही पड़ता है।

27 साल की उम्र, 19 संगीन अपराधों का ‘दबंग’ तस्कर
आईजी विकास कुमार ने बताया कि सुनील कोई मामूली अपराधी नहीं है। इतनी कम उम्र में उस पर राजस्थान, मध्य प्रदेश और एनसीबी (NCB) के कुल 19 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं। एनडीपीएस, आर्म्स एक्ट, हत्या का प्रयास और धोखाधड़ी जैसे संगीन धाराओं में लिप्त सुनील शुरुआत में तस्करों की गाड़ियों को एस्कॉर्ट (ESCORT) करने का काम करता था। पुलिस से बचने में माहिर यह ‘खिलाड़ी’ धीरे-धीरे खुद इतना बड़ा नशा माफिया बन गया कि बड़े-बड़े तस्कर उसे ‘सुरक्षा कवच’ मानकर मोटी रकम देने लगे।
पुलिस को देखते ही ‘फायर’ करने का था दुस्साहस
सुनील की पहचान ही उसकी ‘गोलीबारी’ थी। पाली के सांडेराव, देसूरी और प्रतापगढ़ के छोटी सादड़ी से लेकर अपने गृह क्षेत्र जीरन तक, जब भी पुलिस ने उसे घेरने की कोशिश की, उसने सीधा फायर झोंका और जंगल के रास्ते ओझल हो गया। उसकी इसी ‘साहसिक’ (दुस्साहसी) प्रवृत्ति के कारण वह टॉप-25 नशा तस्करों की सूची में शामिल हो गया था।
‘ऑपरेशन नीलमिणि’: जब वर्दीधारी बना ‘चरवाहा’
सुनील को पकड़ने के लिए ANTF ने बिसात बिछाई। आईजी विकास कुमार ने बताया कि आरोपी अपने घर पर नहीं रहता था। वह जंगल में पेड़ों पर निशान लगाकर अपनी पत्नी से खाना मंगवाता था।
- जंगल का ‘मोगली’: ANTF के एक जांबाज जवान को 15 दिन पहले ही ‘चरवाहे’ के भेष में उस दुर्गम इलाके में तैनात किया गया।
- टेक्निकल जाल: जवान ने इलाके की हर गतिविधि को ट्रैक किया। पता चला कि उसकी गर्लफ्रेंड के माध्यम से वह सूचनाएं ले रहा है।
- कुदरत का साथ: जिस रात टीम ने धावा बोला, भारी बारिश हो रही थी। यह बारिश ANTF के लिए वरदान साबित हुई। बारिश के कारण सुनील जंगल न जाकर घर में ही रुक गया।
ड्रम के पीछे दुबका था ‘शेर’
जब टीम ने घर को चारों तरफ से घेर लिया और दरवाजा खटखटाया, तो सुनील घर के अंदर एक बड़े ड्रम के पीछे रजाई ओढ़कर दुबका हुआ था। शुरुआत में उसने अपना नाम दिनेश बताया, लेकिन जैसे ही सख्ती हुई, वह टूट गया। उसे संभलने का मौका तक नहीं मिला और टीम उसे लेकर सुरक्षित स्थान की ओर निकल गई।
प्रतापगढ़ पुलिस और ANTF की जांबाजी
इस पूरी कार्रवाई में प्रतापगढ़ पुलिस का सहयोग सराहनीय रहा। मध्य प्रदेश के दुर्गम रास्तों और पहाड़ियों की जानकारी के साथ प्रतापगढ़ पुलिस ने ANTF को सुनील के ठिकाने तक पहुँचने में बड़ी भूमिका निभाई।
सम्मान और संकल्प
आईजी विकास कुमार ने कहा कि इस साहसी ऑपरेशन में शामिल पूरी टीम को जल्द ही एक विशेष समारोह में पुरस्कृत किया जाएगा। साथ ही, आमजन से अपील की गई है:
“तुम मुझे सूचना दो, मैं तुम्हें नशे से आजादी दूंगा।” किसी भी जानकारी के लिए ANTF कंट्रोल रूम 0141-2502877 या व्हाट्सएप नंबर 9261225056 पर संपर्क करें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।



