रानीवाड़ा (जालौर):
जालौर जिले का रानीवाड़ा तहसील क्षेत्र इस समय गंभीर कृषि संकट के दौर से गुजर रहा है। मानसून की बेरुखी और बारिश के लंबे अंतराल (ड्राय स्पेल) ने किसानों की महीनों की कड़ी मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में लहलहाने वाली खरीफ की मुख्य फसलें—विशेषकर बाजरा, ग्वार, मूंग और मोठ—तेज धूप और पानी के अभाव में खेतों में ही सूखकर जल गई हैं। किसानों का आकलन है कि क्षेत्र में करीब 60 से 70 फीसदी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं।

हालात इतने बदतर हैं कि दाना पकने से पहले ही बाजरे के पौधे झुलस चुके हैं, जिससे किसानों के सामने न केवल रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है, बल्कि आने वाले दिनों में मवेशियों के लिए चारे का भी भीषण अकाल पड़ने की आशंका गहरा गई है।
खेतों में खड़े हैं सिर्फ सूखे डंठल, लागत तक निकलना नामुमकिन
रानीवाड़ा क्षेत्र के किसानों ने कर्ज लेकर, महंगे बीज, खाद और जुताई में अपनी गाढ़ी कमाई लगाई थी। शुरुआती बारिश के बाद बुवाई तो अच्छी हुई, लेकिन जब फसलों को बढ़वार और दाना बनने के लिए पानी की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तभी बादलों ने मुंह मोड़ लिया।
किसानों द्वारा साझा किए गए वीडियो और जमीनी तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि मीलों तक फैले खेतों में बाजरे की फसलें पूरी तरह पीली पड़कर जल चुकी हैं। जो पौधे हरे होने चाहिए थे, वे कड़क धूप में सूखकर तिनके बन चुके हैं। किसानों का कहना है कि अब फसल कटाई की मजदूरी निकालना भी संभव नहीं है, कई जगहों पर तो किसान लाचार होकर मवेशियों को खेतों में चरने के लिए छोड़ने को मजबूर हैं।
भारतीय किसान संघ मैदान में, एसडीएम को सौंपा था ज्ञापन
किसानों की इस बदहाली को लेकर किसान संगठनों में भारी रोष है। भारतीय किसान संघ (BKS) के नेतृत्व में किसानों ने पिछले दिनों रानीवाड़ा उपखंड अधिकारी (SDM) सुनील कुमार को मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन के माध्यम से संघ ने मांग की है कि:
त्वरित स्पेशल गिरदावरी: पूरे रानीवाड़ा क्षेत्र में राजस्व व कृषि विभाग की संयुक्त टीमें भेजकर बिना किसी देरी के फसल खराबे का सर्वे कराया जाए।
आधिकारिक खराबा घोषणा: 60 से 70 प्रतिशत तक हुए नुकसान को देखते हुए क्षेत्र को तत्काल सूखा/अभावग्रस्त घोषित किया जाए।
फसल बीमा क्लेम का भुगतान: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कागजी औपचारिकताएं कम कर किसानों को सीधे और पारदर्शी तरीके से क्लेम राशि दिलवाई जाए।
आर्थिक सहायता पैकेज: जिन किसानों का बीमा नहीं है, उन्हें राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) से प्रति बीघा उचित मुआवजा दिया जाए।
भारतीय किसान संघ के अलावा अन्य स्थानीय किसान संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने भी सरकार से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। किसान प्रतिनिधियों का स्पष्ट कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कागजी कार्रवाई पूरी कर मुआवजा वितरण शुरू नहीं किया, तो किसान सड़कों पर उतरने को बाध्य होंगे।
'अब सिर्फ सरकार से आस'
स्थानीय किसानों का कहना है कि वे पहले से ही महंगाई और पिछले सालों के कर्जों के बोझ तले दबे हैं। इस बार अच्छी फसल की उम्मीद थी, लेकिन प्रकृति के प्रकोप ने पूरी कमर तोड़ दी है।
"हमने खून-पसीना एक करके खेत तैयार किए थे। खाद-बीज का उधार अभी चुकाया भी नहीं था कि फसल आंखों के सामने जल गई। अब हमारे पास न परिवार पालने के पैसे बचे हैं, न आगे रबी की बुवाई के लिए पूंजी। सरकार तुरंत सर्वे करवाकर खाते में राहत राशि डाले, वरना किसान पूरी तरह तबाह हो जाएगा।"
— सुखदेव सिंह, प्रभावित किसान, रानीवाड़ा क्षेत्र
प्रशासनिक स्तर पर अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उपखंड प्रशासन और राज्य सरकार इस गंभीर संकट पर कब तक संज्ञान लेकर विशेष गिरदावरी के आदेश जारी करती है।









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