तेजावास में क्षत्रिय युवक संघ का चार दिवसीय प्राथमिक शिविर सम्पन्न, संघर्षशीलता और संस्कारों का पाठ
रानीवाड़ा। श्री क्षत्रिय युवक संघ द्वारा तेजावास में आयोजित चार दिवसीय प्राथमिक शिविर रविवार को पूर्ण हुआ। शिविर में अनेक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को न सिर्फ शारीरिक मजबूती बल्कि मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक दृढ़ता का अभ्यास कराया गया। शिविर संचालक नाहरसिंह जाखड़ी ने विदाई समारोह में कहा कि “हमने सिद्धांतों के साथ कभी समझौता नहीं किया और न ही करना चाहिए। संघर्ष जीवन का अनिवार्य हिस्सा है, उससे कभी पलायन नहीं करना चाहिए।”

शिविर में खेल, संस्कार और यज्ञ का महत्व
नाहरसिंह जाखड़ी ने बताया कि इस शिविर में खेल-कूद और सामूहिक गतिविधियों के माध्यम से शिविरार्थियों में संघर्षशीलता और मिल-जुलकर काम करने की भावना का विकास किया गया। चारों दिनों के कार्यक्रम पूर्ण रूप से सामूहिक थे, जिससे हर प्रतिभागी ने एक-दूसरे से सीखने का अवसर पाया।
शिविर में विशेष यज्ञ का आयोजन भी किया गया, जिसमें शिविरार्थियों के साथ ग्रामीणों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया। यज्ञ में सभी ने आहुति देकर सतोगुणी प्रवृत्ति और आत्मिक शुद्धि की ओर बढ़ने की प्रार्थना की। जाखड़ी ने कहा कि यह आहुति केवल अग्नि में नहीं अपितु हमारे दिल और दिमाग में भी होनी चाहिए, ताकि हमारे विचार और कर्म हमेशा सकारात्मक बने रहें।

सिद्धांत आधारित जीवन और जिम्मेदारी
अपने संबोधन में नाहरसिंह जाखड़ी ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि –
“हमेशा अपना कर्तव्य याद रखो, कभी भूलना मत। जिस बीज को संघ ने इन दिनों आपके अंदर बोया है, उसको शाखाओं के माध्यम से सींचते रहो। बाहर की दुनिया दूषित और कठिनाइयों से भरी होगी, लेकिन आपका आचरण और आपकी नीयत साफ होनी चाहिए। यही असली तपस्या है।”
उन्होंने युवाओं को यह संदेश भी दिया कि जीवन में आगे चाहे कितनी भी मुश्किलें आएँ, सिद्धांत और हिम्मत का रास्ता ही अपनाना चाहिए। कभी हार मानना, कभी अपने मूल्यों से समझौता करना क्षत्रिय युवक संघ की परंपरा नहीं है।
विदाई समारोह में गरिमा और जोश
शिविर का समापन विदाई कार्यक्रम के साथ हुआ। इस अवसर पर मंडल प्रमुख रेवन्तसिंह जाखड़ी ने संघ की कार्यप्रणाली और युवाओं की सक्रियता की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे शिविर युवाओं को न केवल एक नया दृष्टिकोण देते हैं बल्कि उनमें समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का अहसास भी करवाते हैं।
कार्यक्रम में भगवानसिंह सांगड़वा, ईश्वरसिंह करड़ा, नारायणसिंह डूंगरी, मोतीसिंह सेवाड़ा, देरावरसिंह उचमत, गणपतसिंह पुर, पृथ्वीसिंह वडवज, झब्बर सिंह लूणाखुर्द, युवराजसिंह करड़ा, हर्षवर्धन सिंह टुआ सहित समस्त ग्रामीण तेजावास मौजूद रहे।
शिविर का असर और समाज में उम्मीद
ग्रामीणों और प्रतिभागियों ने माना कि चार दिनों के इस शिविर ने जहां शारीरिक परिश्रम कराया, वहीं मानसिक, आध्यात्मिक और सामाजिक रूप से भी सबको समृद्ध किया। शिविर समाप्ति के बाद सभी ने यह संकल्प लिया कि यहां सीखी गई बातों को जीवन में पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ अपनाएंगे।



