सिरोही नगर परिषद्: नवनिर्वाचित सभापति रितु पुनीत जैन ने संभाली कमान | बदहाली और भ्रष्टाचार से मिलेगी मुक्ति, हर 3 महीने में प्रबुद्धजनों से संवाद कर बनेगा विकास का मास्टर प्लान
सर्किल न्यूज नेटवर्क सिरोही, 21 सितम्बर 2026।
“नगर परिषद् का यह नया बोर्ड सिरोही के विकास को नई दिशा और गति देगा। हमारा चुनावी घोषणा पत्र केवल वादों का पुलिंदा नहीं, बल्कि नगर परिषद् का आधिकारिक ‘संकल्प पत्र’ होगा। इसी के आधार पर शहर को स्वच्छ, सुंदर और हरा-भरा बनाया जाएगा।” यह बात नगर परिषद् सिरोही की नव-निर्वाचित सभापति रितु पुनीत जैन ने निर्वाचन के उपरांत नगरवासियों को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि बीते ढाई वर्षों में शहरवासियों ने बदहाल व्यवस्थाओं का जो संताप झेला है, उसी का परिणाम है कि जनता ने भाजपा को पूरी तरह नकार दिया। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा के नेतृत्व पर विश्वास जताते हुए जनता ने कांग्रेस को ऐतिहासिक जनादेश सौंपा है। सभापति ने कहा, “जनता-जनार्दन और सभी नवनिर्वाचित पार्षदों का हृदय से आभार। हम शहरवासियों के इस अटूट भरोसे की कसौटी पर शत-प्रतिशत खरा उतरेंगे।”

‘वोट की चोट’ से भाजपा पस्त, क्रॉस वोटिंग ने बढ़ाई जीत की चमक
श्रीमती जैन ने पूर्ववर्ती व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि पूर्व विधायक संयम लोढ़ा के कार्यकाल में सिरोही ने बदलाव की जो राह पकड़ी थी, बाद के समय में वह पूरी तरह पटरी से उतर गई। शहर की सफाई व्यवस्था, जर्जर सड़कें, ठप पड़ी सीवरेज परियोजना, बेकाबू ट्रैफिक, अनियंत्रित अतिक्रमण, अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार ने सिरोही को बेहाल कर दिया। जनता ने ‘वोट की चोट’ के जरिए भाजपा को महज 10 सीटों पर समेट दिया, जबकि कांग्रेस ने 35 में से 23 वार्डों में परचम लहराया।
सभापति चुनाव में कांग्रेस को 23 के बजाय 30 मत प्राप्त हुए, जिससे साफ जाहिर है कि भाजपा के 10 में से 5 पार्षदों ने भी कांग्रेस के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की। उन्होंने प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी श्रीमती पूजा गोपाल माली को शिकस्त देकर यह जीत दर्ज की।
बुनियादी सुधार और डिजिटल जनसुनवाई पहली प्राथमिकता
नवनिर्वाचित सभापति ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका मुख्य फोकस शहर की आधारभूत सफाई व्यवस्था, सीवरेज सिस्टम, पार्किंग, सुगम यातायात, उद्यानों का कायाकल्प, स्ट्रीट लाइट और प्रमुख नालों-नालियों की मुकम्मल सफाई पर रहेगा।
नगर परिषद् की कार्यप्रणाली में आमूलचूल सुधार किए जाएंगे ताकि आमजन को दफ्तर के बेवजह चक्कर न काटने पड़ें। इसके लिए जनसुनवाई का एक प्रभावी ‘डिजिटल सिस्टम’ तैयार किया जाएगा। उन्होंने ऐलान किया कि वे स्वयं लगातार फील्ड में रहकर जनता से सीधा संवाद रखेंगी। साथ ही, सभी पार्षदों से भी आग्रह किया कि वे अपने-अपने वार्डों में सक्रिय रहकर समस्याओं को त्वरित रूप से बोर्ड के संज्ञान में लाएं। शहर की आमदनी बढ़ाने और विकास को सुनियोजित रूप देने के लिए हर तीन महीने में प्रबुद्धजनों के साथ बैठक कर ‘सिरोही मास्टर प्लान’ तैयार किया जाएगा।
खास परिचय: सरकारी स्कूल से नगर सरकार के शीर्ष तक
- जड़ों से जुड़ाव: 49 वर्षीय रितु जैन का जन्म आबूरोड तहसील के आकराभट्टा गांव में हुआ। उनके दादा स्व. शांतिस्वरूप अग्रवाल आकराभट्टा के सरपंच तथा पिता भगवान अग्रवाल वार्ड पंच रहे। सात भाइयों के बीच वे इकलौती लाडली बहन हैं।
- शिक्षा की राह: रितु जैन ने प्रारंभिक शिक्षा आकराभट्टा के मिडिल स्कूल से और कक्षा 9 से 12वीं तक की पढ़ाई आर्य समाज स्कूल, आबूरोड से पूरी की। इसके बाद उन्होंने आबूरोड कॉलेज से प्राइवेट बीए और विवाह के उपरांत सिरोही पीजी कॉलेज से एम.ए. की उपाधि प्राप्त की।
- प्रतिष्ठित राजनीतिक घराने की विरासत: वर्ष 2001 में उनका विवाह सिरोही के प्रतिष्ठित नगर सेठ स्व. लाला लखमीचंद जैन के पौत्र और स्व. सुरेंद्र कुमार जैन के सुपुत्र पुनीत जैन (वर्तमान अध्यक्ष, सिरोही नगर कांग्रेस कमेटी) के साथ हुआ। यह परिवार पीढ़ियों से कांग्रेस और नगर सेवा से जुड़ा रहा है। परिवार से स्व. लाला लखमीचंद जैन तथा उनके सुपुत्र स्व. विमलचंद जैन पूर्व में नगर पालिका अध्यक्ष रह चुके हैं। अब तीसरी पीढ़ी के रूप में रितु पुनीत जैन के कंधों पर नगर परिषद् की जिम्मेदारी आई है। उनके ससुर स्व. सुरेंद्र जैन भी पालिका पार्षद और नगर कांग्रेस अध्यक्ष रहे थे।
विश्लेषकों की नजर: चुनौतियां और भविष्य की बिसात
राजनीति के अखाड़े में प्रत्यक्ष रूप से रितु जैन का यह पहला बड़ा कदम है, लेकिन संयुक्त परिवार के अनुभव, उच्च शिक्षा और सुलझे व्यक्तित्व के दम पर वे मजबूत प्रशासक सिद्ध हो सकती हैं। उन्हें पूर्व विधायक संयम लोढ़ा व उनकी अनुभवी टीम का पूरा मार्गदर्शन प्राप्त है।
हालांकि, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती नगर परिषद् के बिगड़े सिस्टम को पटरी पर लाना और घोषणा पत्र के हर वादे को जमीनी धरातल पर उतारना है। आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कम समय में ठोस काम कर “काम बोलता है” का माहौल तैयार करना उनके नेतृत्व की सबसे अहम अग्निपरीक्षा होगी।







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