ईटादा/धरणावास, (सर्कल न्यूज़ नेटवर्क): ग्राम पंचायत ईटादा के धरणावास गांव में पारंपरिक जल स्रोत, 'नाडी' को पाटकर समतल बनाने और उस पर पौधारोपण करने के ग्राम पंचायत के फैसले से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सरपंच की मनमानी के कारण न सिर्फ उनका सदियों पुराना जल संग्रह का स्रोत नष्ट हो गया है, बल्कि मवेशियों के लिए पीने के पानी का संकट भी गहरा गया है। इस पूरे मामले को लेकर ग्रामीणों ने सरपंच के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही नाडी का पुनरुद्धार नहीं किया गया और तारबंदी नहीं हटाई गई, तो वे कार्यालय के सामने धरने पर बैठेंगे।
युवा समाजसेवी भरतदान चारण के नेतृत्व में ग्रामीणों ने एक ज्ञापन सौंपकर अपनी पीड़ा व्यक्त की है। उनका कहना है कि धरणावास की पुरानी नाडी गांव की पहचान थी और यह सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि बेसहारा पशुओं के लिए भी साल भर पानी का एकमात्र स्रोत थी। उन्होंने बताया कि इस नाडी पर मनरेगा के तहत मजदूरों ने काम भी किया था, लेकिन अब इसे रेत-कंकड़ डालकर पूरी तरह से समतल कर दिया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच ने उनकी भावनाओं और जरूरतों को नजरअंदाज करते हुए यह कदम उठाया है।
मुख्य मांगें और चेतावनी:
- नाडी का पुनरुद्धार: ग्रामीणों की सबसे पहली मांग है कि ध्वस्त की गई नाडी को वापस उसके मूल स्वरूप में लाया जाए, ताकि वर्षा जल का संग्रह हो सके।
- तारबंदी हटाई जाए: गांव की नाडी के किनारे की सड़क पर की गई तारबंदी को तुरंत हटाया जाए, जिससे आवारा पशु नाडी तक पहुंच सकें।
- रोजगार का संकट: नाडी पर चल रहा मनरेगा का काम रुकने से कई मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
- पशुओं पर संकट: ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर पानी के अभाव में मवेशी मरने लगे तो इसकी पूरी जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की होगी।
ग्रामीणों ने कहा है कि उन्होंने सरपंच से कई बार निवेदन किया, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। अब वे इस मुद्दे पर अडिग हैं और अगर प्रशासन ने जल्द कोई कदम नहीं उठाया तो वे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को मजबूर होंगे। यह शिकायत ऐसे समय में सामने आई है जब जल संरक्षण और पारंपरिक जल स्रोतों के पुनरुद्धार पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में एक पारंपरिक नाडी को पाटने का मामला कई सवाल खड़े कर रहा है।







पाठक टिप्पणियां (Comments)
0 टिप्पणियां