बार-बार अतिक्रमण करने पर तीन महीने की जेल, गिरफ्तारी वारंट जारी; कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने पर हुई सख्त कार्रवाई
सांचौर। सरकारी जमीन और आम रास्तों पर अवैध कब्जा करने की नीयत रखने वालों के लिए यह एक बेहद कड़ा और सबक देने वाला फैसला है। न्यायालय तहसीलदार सांचौर द्वारा राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 91(2) के तहत एक बड़ी कार्रवाई करते हुए, सरकारी रास्ते की भूमि पर बार-बार अतिक्रमण करने के मामले में दोषियों को तीन माह की सजा का आदेश जारी किया गया है। प्रशासन के इस सख्त रुख से भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों में हड़कंप मच गया है।
बार-बार बेदखली के बाद भी नहीं सुधरे अतिक्रमी
मामला पटवार हल्का हाड़ेतर के मौजा फालना ग्राम का है। सांचौर तहसीलदार प्रवीण कुमार चौधरी ने बताया कि फालना निवासी अतिक्रमी दरगाराम, सावलाराम एवं हरचंदराम (पुत्र लच्छाराम रेबारी) द्वारा राजस्व सीमा में स्थित खसरा नंबर 603 (रकबा 0.94 हेक्टेयर) पर अवैध रूप से अतिक्रमण किया जा रहा था।
यह जमीन राजस्व अभिलेखों में 'गैर मुमकिन रास्ता' और 'सरकारी भूमि' के रूप में दर्ज है। इस रास्ते को अतिक्रमियों द्वारा बार-बार अवरुद्ध किया जा रहा था। न्यायालय ने इस संबंध में पहले भी प्रकरण दर्ज कर इन्हें बेदखल करने के आदेश जारी किए थे।
कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाना पड़ा भारी
प्रशासन द्वारा बार-बार चेतावनी देने और पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद गैरसायलान (अतिक्रमियों) ने न्यायालय के आदेशों की सरेआम अवहेलना की और आम रास्ते को फिर से अवरुद्ध कर दिया। आखिरकार, कानून का मखौल उड़ाने वाले इन अतिक्रमियों के खिलाफ न्यायालय ने सख्त विधिसम्मत कार्रवाई करते हुए राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम की धारा 91(2) के तहत तीन महीने के कारावास का आदेश सुनाकर उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है।
📌 क्या होता है 'गैर मुमकिन रास्ता'? समझिए इसका महत्व
राजस्व शब्दावली में 'गैर मुमकिन रास्ता' उस सरकारी या सार्वजनिक भूमि को कहा जाता है जिसका उपयोग आम जनता, ग्रामीणों और मवेशियों के आवागमन के लिए हमेशा खुला रहता है।
- नो-टोलरेंस ज़ोन: इस प्रकार की भूमि पर किसी भी व्यक्ति का निजी मालिकाना हक नहीं हो सकता और न ही इस पर किसी प्रकार का निर्माण या खेती की जा सकती है।
- कड़ा कानून: ऐसी जमीनों को सार्वजनिक हित के लिए सुरक्षित रखा जाता है। यदि कोई व्यक्ति इस रास्ते को रोकता है या इस पर कब्जा करने की कोशिश करता है, तो प्रशासन को बिना किसी लंबे इंतजार के उसे तुरंत हटाने और दोषी को जेल भेजने तक के कड़े कानूनी अधिकार प्राप्त हैं।
समाज में जाएगा सकारात्मक संदेश
तहसीलदार कोर्ट के इस कड़क फैसले की पूरे इलाके में चर्चा है। आम जनता का मानना है कि इस फैसले से समाज में एक बेहद सकारात्मक और कड़ा संदेश जाएगा कि सरकारी संपत्तियों और आम रास्तों पर अवैध कब्जा करने का अंजाम सीधे जेल की सलाखें होगा। कोई भी रसूखदार या दबंग अब सार्वजनिक रास्तों को रोकने की हिम्मत नहीं कर सकेगा।







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