ग्राम पंचायत धानोल के ग्रामीण सेवा शिविर में बरसों पुराना सपना हुआ साकार; जानिए कैसे एक सरकारी पहल ने बदला ग्रामीण का जीवन।
“सालों से जिस जमीन पर हमारा आशियाना था, आज सरकारी पट्टा हाथ में आते ही लगा कि वाकई अब हम अपनी ही जमीन के मालिक बन गए हैं। सरकार और प्रशासन का यह शिविर हमारे जैसे गरीबों के लिए वरदान साबित हुआ है।”
— रीदाराम रेबारी, भावुक लाभार्थी
हक की लड़ाई और वर्षों का इंतजार
जालौर जिले की रानीवाड़ा पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत धानोल के रहने वाले रीदाराम रेबारी की कहानी केवल एक पट्टे की नहीं, बल्कि अपने ही हक को पाने के संघर्ष और धैर्य की कहानी है। रीदाराम वर्षों से अपनी पुश्तैनी आबादी भूमि के मालिकाना हक (पट्टे) के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। तकनीकी पेचीदगियों और जानकारी के अभाव में उनका यह सपना सालों से अधूरा था। लेकिन कहते हैं न कि जहां चाह होती है, वहां प्रशासन की सही पहल मिल जाए तो राह आसान हो जाती है।
ग्रामीण सेवा शिविर: गांवों के विकास का ‘सिंगल विंडो’ समाधान
राज्य सरकार द्वारा आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर ग्रामीण इलाकों के लिए एक वरदान साबित हो रहे हैं। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को एक ही छत के नीचे तमाम सरकारी योजनाओं का लाभ देना और उनके वर्षों से लंबित राजस्व व प्रशासनिक मामलों का मौके पर ही निपटारा करना है।
धानोल में आयोजित इस विशेष शिविर में न केवल स्वामित्व योजना, बल्कि पेंशन, जन आधार, और कृषि से जुड़ी विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का ऑन-द-स्पॉट समाधान किया जा रहा था। प्रशासन खुद चलकर जनता के द्वार तक पहुंचा था ताकि किसी भी ग्रामीण को जिला या उपखंड मुख्यालय के चक्कर न काटने पड़ें।
‘स्वामित्व योजना’ ने दिया आशियाने को असली नाम
इसी शिविर में जब रीदाराम रेबारी का मामला स्वामित्व योजना के तहत सामने आया, तो प्रशासन ने तत्परता दिखाई। दशकों से लंबित उनकी पुश्तैनी भूमि के दस्तावेजों की मौके पर ही जांच की गई और पूरी कानूनी प्रक्रिया को चंद घंटों में अमलीजामा पहनाया गया।
शिविर में मौजूद मुख्य अतिथियों—रानीवाड़ा उपखंड अधिकारी (SDM) सुनील कुमार कटेवा और ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) हेमलता विश्नोई—ने जब अपने हाथों से रीदाराम को उनकी पुश्तैनी जमीन का मालिकाना पट्टा सौंपा, तो रीदाराम की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। इस ऐतिहासिक पल के साक्षी वहां मौजूद अन्य अधिकारी, कार्मिक और सैकड़ों ग्रामीण बने, जिन्होंने तालियों के साथ रीदाराम की इस सफलता का स्वागत किया।
प्रेरणा: हौसला रखें, प्रशासन आपके साथ है
रीदाराम रेबारी की यह सफलता इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि सही मंशा और सही मंच (ग्रामीण सेवा शिविर) मिल जाए, तो बड़े से बड़ा प्रशासनिक गतिरोध भी दूर हो जाता है। यह कहानी हर उस ग्रामीण को प्रेरित करती है जो अपने हक के लिए आशान्वित है। सरकार के ये शिविर इसी बदलाव की बयार हैं, जो अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को उसका अधिकार दिलाकर उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बना रहे हैं।



