बैकुंठी यात्रा में गूंजे जयकारे, नम आंखों से मौखातरा ने अपने मार्गदर्शक को दी विदाई
रानीवाड़ा। क्षेत्र के प्राचीन दुधेश्वर महादेव मंदिर के परम श्रद्धेय संत कस्तूरदास महाराज के देवलोकगमन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर छा गई है। मंगलवार को जब संत की बैकुंठी यात्रा निकली, तो समूचा मौखातरा गांव उनके अंतिम दर्शनों के लिए सड़कों पर उमड़ पड़ा। सादगी और तपस्या की प्रतिमूर्ति रहे महाराज की विदाई में हर आंख नम नजर आई।

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ निकली अंतिम यात्रा
दुधेश्वर महादेव मंदिर परिसर से संत कस्तूरदास महाराज की बैकुंठी यात्रा पूर्ण धार्मिक परंपराओं और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शुरू हुई। यात्रा के दौरान 'राम नाम सत्य है' और 'संत कस्तूरदास महाराज अमर रहें' के जयघोषों से आकाश गुंजायमान हो उठा। गांव के विभिन्न मार्गों से गुजरी इस यात्रा में पुष्प वर्षा कर ग्रामीणों ने अपने आराध्य संत को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद लिया।
धार्मिक चेतना के केंद्र थे महाराज
ग्रामीणों ने बताया कि संत कस्तूरदास महाराज ने अपना संपूर्ण जीवन समाज सेवा और ईश्वर भक्ति में समर्पित कर दिया। उनके सान्निध्य में दुधेश्वर महादेव मंदिर न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक चेतना का भी केंद्र बना। उन्होंने सदैव सदाचार और सेवा का मार्ग दिखाया। क्षेत्र के लोगों के लिए वे केवल एक संत नहीं, बल्कि एक सच्चे मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत थे।
क्षेत्रीय गणमान्यों ने जताया शोक
बैकुंठी यात्रा में विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा और क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने महाराज के निधन को अपूरणीय क्षति बताया। यात्रा के समापन पर धार्मिक विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया संपन्न की गई। भले ही वे पंचतत्व में विलीन हो गए हों, लेकिन उनके विचार और आदर्श सदैव क्षेत्रवासियों के हृदय में जीवित रहेंगे।







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