जालोर। आम जनता और व्यापारियों की जेब पर माप-तौल के जरिए डाका डालने वालों पर जालोर प्रशासन का हंटर चला है। उपभोक्ता मामलात विभाग की टीम ने जिलेभर में संचालित धर्मकांटों पर ताबड़तोड़ औचक छापेमारी कर माप-तौल में चल रही बड़ी अनियमितताओं की पोल खोल दी है। नरसाना और सानगना जैसे बड़े टोल प्लाजा से लेकर खनन क्षेत्रों में धड़ल्ले से बिना सत्यापन के चल रहे कांटों को देखकर जांच टीम भी दंग रह गई। त्वरित कार्रवाई करते हुए विभाग ने कांटे जब्त करने के साथ भारी जुर्माना ठोक दिया है।
टोल प्लाजा से लेकर खदानों तक फैला जाल
विधिक माप विज्ञान अधिकारी हनु इंद्र सिंह के नेतृत्व में मंत्री सुमित गोदारा के निर्देशों के तहत यह विशेष अभियान चलाया गया। जैसे ही टीम ने अचानक दस्तक दी, धर्मकांटा संचालकों में अफरा-तफरी मच गई। जांच में सामने आया कि टोल प्लाजा और खनन क्षेत्रों में जिन कांटों पर रोजाना सैकड़ों भारी वाहनों और लाखों टन माल का वजन तोला जा रहा था, वे लंबे समय से प्रमाणित ही नहीं थे।
विभाग द्वारा की गई प्रमुख कार्रवाइयां:
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नरसाना व सानगना टोल प्लाजा: यहां स्थापित धर्मकांटे बिना सत्यापन के संचालित पाए गए। टीम ने तुरंत प्रभाव से इन्हें जब्त कर संचालकों को 7 दिन के भीतर नियमानुसार सत्यापन कराने के लिए पाबंद किया।
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ईश्वेश्वर धर्मकांटा: खनन कार्य में खुलेआम बिना सत्यापन के कांटे का इस्तेमाल पकड़ा गया। विभाग ने मौके पर ही ₹5,000 का शमन शुल्क वसूला और 3 दिन के भीतर कानूनी प्रक्रिया पूरी करने का कड़ा नोटिस थमाया।
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उम्मा धर्मकांटा: नियमों की अनदेखी पर ₹5,000 का चालान काटकर अनियमितताओं को तुरंत दुरुस्त करने के आदेश जारी किए गए।
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कुल कार्रवाई: अलग-अलग अनियमितताओं को लेकर कुल ₹10,500 का जुर्माना वसूला गया तथा कई प्रतिष्ठानों को चेतावनी नोटिस दिए गए।
विवेचना: क्यों गंभीर है धर्मकांटों का यह 'वजनदार' फर्जीवाड़ा?
धर्मकांटों पर होने वाली हेराफेरी केवल तकनीकी चूक नहीं, बल्कि सीधे तौर पर एक बड़ा आर्थिक अपराध है:
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राजस्व और जनता को दोहरी चपत: टोल प्लाजा पर ओवरलोडिंग की जांच और टैक्स का निर्धारण वजन के आधार पर होता है। यदि टोल कांटा ही असत्यापित है, तो ओवरलोडिंग वाहनों पर सही निगरानी नहीं हो सकती, जिससे सड़कों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है और राजस्व को सीधा नुकसान होता है।
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खनन क्षेत्र में अवैध खेल की आशंका: खनन सामग्री (बजरी, पत्थर, मार्बल आदि) की रॉयल्टी और बिलिंग पूरी तरह धर्मकांटे के वजन पर टिकी होती है। असत्यापित कांटों का उपयोग यह दर्शाता है कि वजन घटाकर या बढ़ाकर रॉयल्टी चोरी और टैक्स में हेरफेर की पूरी गुंजाइश बनाई जा रही थी।
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उपभोक्ता अधिकारों का हनन: किसान अपनी उपज बेचता हो या कोई व्यापारी भारी निर्माण सामग्री मंगवाता हो, गलत माप-तौल से सीधा नुकसान अंतिम उपभोक्ता की जेब पर पड़ता है।
प्रशासन की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि नियमों की आड़ में मनमानी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। आगामी दिनों में होने वाले औचक निरीक्षणों से उन संचालकों में हड़कंप मचना तय है जो लंबे समय से सत्यापन से बचते आ रहे थे।









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