दईपुर, रानीवाड़ा की प्रेरक कहानी –
हुआ देवी की मुस्कान में लौटी उम्मीद
राजस्थान सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, खासकर मुख्यमंत्री एकल नारी पेंशन योजना, उन महिलाओं के लिए जीवन की नई किरण बन गई हैं, जिनके पास सहारा नहीं है। कई बार समाज की हाशिए पर पड़ी, अकेली, वृद्ध और असहाय महिलाओं के लिए यह पेंशन योजना किसी वरदान से कम नहीं।
लेकिन जब जानकारी के अभाव, अस्वस्थता या असमर्थता के कारण उनका हक भी छिनने लगे, तब प्रशासन की संवेदनशीलता और सरकार की सक्रियता उनके लिए एक नई उम्मीद बनकर सामने आती है।
ऐसी ही एक मार्मिक कहानी है दईपुर ग्राम पंचायत की हुआ देवी की, जिनके चेहरे पर वर्षों बाद फिर से मुस्कान लौटी – और उसका श्रेय जाता है राज्य सरकार की योजनाओं, प्रशासनिक अधिकारियों और समाज के संवेदनशील लोगों को।
हुआ देवी – अकेलेपन से आत्मसम्मान तक
1. संघर्ष और अकेलापन
हुआ देवी, ग्राम पंचायत दईपुर की रहने वाली, जीवन के अंतिम पड़ाव पर हैं। पति की मृत्यु के बाद परिवार में कोई नहीं बचा। तीन बेटियां थीं, जिनकी शादी हो चुकी है। वृद्धावस्था और बीमारी के कारण वे चल-फिर भी नहीं सकतीं।
मुख्यमंत्री एकल नारी पेंशन योजना से मिलने वाली राशि, उनके लिए दवा, भोजन और जीवनयापन का एकमात्र सहारा थी। लेकिन डिजिटल जानकारी के अभाव और असमर्थता के कारण वे पेंशन का वार्षिक सत्यापन निर्धारित तिथि तक नहीं करवा पाईं, जिससे उनकी पेंशन बंद हो गई। यह उनके लिए दोहरी मार थी – न शारीरिक ताकत, न आर्थिक सहारा।
2. उम्मीद की किरण – शिविर और प्रशासनिक संवेदनशीलता
दईपुर में “दीनदयाल उपाध्याय अन्त्योदय संबल पखवाड़ा 2025” के तहत शिविर लगा। समाज कल्याण विभाग के कर्मचारी अशोक कुमार गोयल को जब हुआ देवी की स्थिति का पता चला, तो उन्होंने पंचायत समिति रानीवाड़ा की विकास अधिकारी सुश्री हेमलता बंबोई से संपर्क किया।
विकास अधिकारी ने तुरंत निर्देश दिया कि अशोक कुमार गोयल और उनके सहयोगी पड़ोसी भगत बाबू भाई के साथ हुआ देवी के घर जाएं।
वहां, खाट पर बैठी उस वृद्ध मां का पेंशन सत्यापन मोबाइल पोर्टल के माध्यम से किया गया। जैसे ही उन्हें बताया गया कि अब उनकी पेंशन फिर से चालू हो जाएगी, उनके चेहरे पर वर्षों बाद सच्ची खुशी और संतोष की झलक दिखाई दी।
3. आत्मनिर्भरता और सम्मान
अब हुआ देवी को हर माह पेंशन की राशि सीधे बैंक खाते में मिलेगी। इससे वे अपनी दवाइयों और जरूरतों का खर्च खुद उठा सकेंगी। सबसे बड़ी बात – अब उन्हें जीवनयापन के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
राज्य सरकार और प्रशासन के प्रति उन्होंने दिल से आभार जताया। उनके लिए यह योजना अब सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और जीने की नई उम्मीद है।
सरकार और प्रशासन की संवेदनशीलता – एक मिसाल
- “दीनदयाल उपाध्याय अन्त्योदय संबल पखवाड़ा” के तहत राजस्थान के गांव-गांव में शिविर लगाकर, असहाय, वृद्ध, एकल महिलाओं तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है।
- प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी जरूरतमंदों के घर-घर जाकर, उनकी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं।
- डिजिटल असाक्षरता, अस्वस्थता या जानकारी के अभाव में फंसे लोगों को चिन्हित कर, उनका हक दिलाया जा रहा है।
- यह कहानी बताती है कि सरकार और प्रशासन की संवेदनशीलता, और समाज के सहयोग से, सबसे कमजोर और असहाय व्यक्ति तक भी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा सकता है।
- “दीनदयाल उपाध्याय अन्त्योदय संबल पखवाड़ा 2025” ने राजस्थान के लाखों वृद्ध, एकल, असहाय महिलाओं के जीवन में आत्मसम्मान और सुरक्षा की भावना जगाई है।
- हुआ देवी की तरह, हर जरूरतमंद को उसका अधिकार मिले – यही इस अभियान का असली उद्देश्य है।
"अब मुझे अपने जीवनयापन के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सरकार और प्रशासन ने मुझे जीने की नई उम्मीद दी है।"
— हुआ देवी
दईपुर की हुआ देवी की यह कहानी राजस्थान के हर गांव, हर घर के लिए प्रेरणा है। सरकार, प्रशासन और समाज की साझी संवेदनशीलता से हर चेहरे पर मुस्कान लौटाई जा सकती है।
"दीनदयाल उपाध्याय अन्त्योदय संबल पखवाड़ा 2025" सचमुच उम्मीद की नई रौशनी है – हर जरूरतमंद के लिए।







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