मातृशक्ति के गरबा, 251 यूनिट रक्तदान और दही-हांडी से भक्तिमय हुआ माहौल; गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी और BSF कमांडेंट अनिल यादव ने दी ऐतिहासिक उपस्थिति
वीर शिरोमणि रूपाजी आंजणा धाम किलवा के प्रथम वार्षिकोत्सव एवं पावन पर्व श्री कृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कानूड़ा महोत्सव का आयोजन किया गया। श्री श्री 1008 महंत रतनगिरी जी महाराज एवं श्री श्री 1008 महंत भरत नाथ जी महाराज (कमालपुरा) के पावन सानिध्य में आयोजित यह महाउत्सव भक्ति, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का ऐसा अद्भुत संगम बना, जिसने रूपाजी धाम किलवा के नाम को इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में हमेशा-हमेशा के लिए दर्ज करा दिया है।

इस पूरे आयोजन की सबसे विशेष, अनूठी और दिल छू लेने वाली परंपरा यह रही कि समाज के श्रद्धालुओं ने सर्वप्रथम अपने-अपने घरों में भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमाएं स्थापित कर पूरे विधि-विधान एवं हर्षोल्लास के साथ जन्मोत्सव मनाया। इसके पश्चात घर-घर से शुरू हुए इस उत्सव को किलवा की पावन धरा पर लाकर सामूहिक रूप दिया गया। विभिन्न गांवों एवं ढाणियों सहित पुणे (महाराष्ट्र) से लाई गई कुल 35 कानूड़ा (भगवान श्री कृष्ण) की प्रतिमाओं के सानिध्य में यह अनूठा महोत्सव आयोजित हुआ। इस विशाल आयोजन में सांचौर, चितलवाना, रानीवाड़ा, बागोड़ा, भीनमाल, सायला-जालोर और गुजरात के बनासकांठा जिले से हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्ति भावना के साथ शामिल हुए।

महोत्सव के दौरान विशेष रूप से मातृशक्ति की सहभागिता दर्शनीय रही। महिलाओं ने पारंपरिक गीतों, ढोल एवं डीजे की धुन पर जमकर गरबा नृत्य किया और पूरे रूपाजी आंजणा धाम को भक्तिमय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण से सराबोर कर दिया। श्री कृष्ण के गगनभेदी जयकारों और भजनों की गूंज से पूरा धाम परिसर गुंजायमान हो उठा। इसके साथ ही भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा दही-हांडी कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसने पूरे समां को बांध दिया। श्रद्धालुओं ने इस दौरान अत्यंत उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे धाम परिसर में श्रद्धा और उल्लास का अनूठा माहौल देखने को मिला।
कानूड़ा महोत्सव की पूर्व संध्या पर गुजरात विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी ने वीर शिरोमणि रूपाजी आंजणा धाम किलवा पहुंचकर समाजबंधुओं को संबोधित किया। अपने प्रेरणादायी संबोधन में उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण एवं वीर शिरोमणि रूपाजी आंजणा ने विपरीत परिस्थितियों में भी परमार्थ, जनसेवा और समाज सुधार के कार्यों को प्राथमिकता दी थी। हमें भी उनके जीवन और आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज तथा जनसेवा के कार्यों में निरंतर योगदान देना चाहिए। उन्होंने समाज को एकजुट रहकर सामाजिक उत्थान के लिए कार्य करने का पुरजोर आह्वान किया। इस अवसर पर सांचौर विधायक जीवाराम चौधरी, जालोर-सिरोही पूर्व सांसद देवजी पटेल, दानाराम चौधरी, मोतीराम चौधरी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और समाजबंधु उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में उपस्थित BSF 56वीं बटालियन (महेसाणा) के कमांडेंट अनिल कुमार यादव ने भी समाजबंधुओं को संबोधित करते हुए शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बच्चों को किताबी शिक्षा देने के साथ-साथ संस्कार देना भी अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार के भव्य धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन हमारी परंपराओं को जीवंत रखने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक बेहद महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं। उन्होंने समाज से अपने बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ अपनी संस्कृति से भी जोड़े रखने का आह्वान किया।
धार्मिक और सांस्कृतिक उल्लास के साथ-साथ इस महोत्सव में मानव सेवा का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया गया। 'आंजणा रक्त मित्र ऐप' के तत्वावधान में एक विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें समाजबंधुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए कुल 251 यूनिट रक्तदान किया। रक्तदाताओं ने रक्तदान को मानव सेवा का सबसे बड़ा माध्यम बताते हुए समाजहित के कार्यों में सदैव तत्पर रहने का संदेश दिया।

यह भव्य कानूड़ा महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित न रहकर समाज की अटूट एकता, आपसी प्रेम, सेवा भावना, सांस्कृतिक गौरव, मातृशक्ति की सशक्त सहभागिता और भगवान श्री कृष्ण के प्रति अटूट आस्था का अनुपम उदाहरण बन गया। इस आयोजन को सफल बनाने में समस्त ग्रामवासियों, आयोजक संस्था एवं आंजणा समाज के प्रत्येक व्यक्ति का सेवा, सहयोग और समर्पण सराहनीय रहा, जिसकी बदौलत हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता से यह प्रथम वार्षिकोत्सव ऐतिहासिक एवं यादगार बन गया।









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