अतिथियों ने समय प्रबंधन, नवाचार, रूचि विषयों पर जाहिर किए अपने विचार
चितलवाना। ऑक्सफोर्ड इंटरनेशनल कॉलेज परावा, सांचौर में पांच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम के प्रथम उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. हिमान्शु पंडया प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय रानीवाड़ा, कार्यक्रम की अध्यक्षता हरीश विश्नोई अध्यक्ष ओम विष्णु शिक्षण संस्थान परावा, मैनेजिंग डायरेक्टर मालाराम साहु सचिव ओम विष्णु शिक्षण संस्थान परावा, मुख्यवक्ता डॉ. चक्रवर्ती सिंह सहायक आचार्य राजकीय महाविद्यालय आहोर, डॉ. भागीरथ बिश्नोई निदेशक ऑक्सफोर्ड इंटरनेशनल कॉलेज परावा, कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. सुनीता प्राचार्य व निदेशक आईक्युसी के द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. हिमान्शु पंडया ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षक दो प्रकार के होते है एक शिलार्थी व दूसरा आकाश धर्मा गुरू होते है। जिस शिक्षक के पास ज्ञान की सीमा नहीं होती है वह शिलार्थी शिक्षक होता है। दूसरा शिक्षक जो विद्यार्थी को पढ़ने का तरीका बता सकता है। शिक्षक विद्यार्थी को दूर तक देखने के लिए कन्धा देता है। उन्होने कहा कि शोध व शिक्षण आपसी समन्वय है।
कार्यक्रम के अध्यक्ष हरीश विश्नोई ने कहा कि हमें आदर्श शिक्षक का अनुसरण करना चाहिए। कार्यक्रम में प्राचार्य सुनीता ने अतिथिण व मुख्यवक्ता डॉ.चक्रवर्ती सिंह व इजि.तपेश सारसोदीया का स्वागत व परिचय करवाते हुए उनके अनुभव के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की।

उन्होने अपने उद्बोधन में कहा की एक शिक्षक के विकास के लिए नवाचार होना आवश्यक है। शिक्षक वो किसान है शिष्य के दिमाग में बिज बोता है। मैनेजिंग डारेक्टर मालाराम साहु ने कहा की शिक्षक एक राष्ट्र निर्माता होता है जो सुनागरीक का निर्माण करता है।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में आभार वक्त करते हुए डॉ. भागीरथ बिश्नोई ने कहा कि एक अच्छी शिक्षण संस्थान के लिए नवीन विषय को लेकर नवाचार किया जाना चाहिए। साथ ही संकाय विकास कार्यक्रम व्यक्तित्व विकास का मुख्य हिस्सा है। तथा अंत में सभी अतिथिगण, मुख्यवक्ताओं व स्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में रिसोर्स पर्सन डॉ. चक्रवर्ती सिंह ने समय प्रबंधन विषय पर समय की वास्तविकता के बारे में बताते हुए कहा कि समय प्रबंधन एक प्रक्रिया है। समय प्रबंधन से कार्य में दक्षता आती है। समय प्रबंधन में विभिन्न उपकरण कौशल से कमजोरियों को दूर किया जा सकता है। तथा आज का कार्य कल पर नहीं छोड़े। समय की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए विस्तृत जानकारी दी।

द्वितीय सत्र के चेयर पर्सन डॉ. सत्येंद कुमार उब्बा प्राचार्य श्री रघुनाथ विश्नोई मेमोरियल कॉलेज रानीवाड़ा ने आर्शीवचन में कहा कि अच्छा शिक्षक समाज का विकास कर सकता है। विद्यार्थी का कर्तव्य के प्रति लगाव होना चाहिए। द्वितीय सत्र में सह-समन्वयक लाला राम ने रिसोर्स पर्सन डॉ.चक्रवर्ती सिंह, अतिथिगण व प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
तृतीय सत्र में रिसोर्स पर्सन इजि तपेश सारसोदिया ने बताया कि किसी भी शोध को करने के लिए व्यक्तिगत रूचि का होना आवश्यक है तभी हम इस शोध की वास्तविकता तक पहुंच सकेंगे। तृतीय सत्र के चेयर पर्सन डॉ. धर्माराम सारण प्राचार्य ग्लोबल इंस्टीट्यूट डेडवा ने संकाय विकास कार्यक्रम के बारे में अपने विचार प्रस्तुत किये।
कार्यक्रम में मंच संचालन डॉ.गणपत सिंह राजपुरोहित प्रधानाचार्य अमर इंटरनेशन विद्यालय पालड़ी व सहायक आचार्य एलची विश्नोई के द्वारा किया गया। समस्त स्टाफ सदस्य और विद्यार्थी उपस्थित रहें।







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