सांचौर/जालोर। नर्मदा मुख्य नहर पर निर्भर राजस्थान और गुजरात के करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण सूचना है। आगामी 2 अप्रैल 2026 से नर्मदा नहर में जलप्रवाह पूरी तरह बाधित रहेगा। नहर के रखरखाव, आवश्यक मरम्मत और सिल्ट (मिट्टी) सफाई के कार्यों को पूरा करने के लिए प्रशासन ने 21 दिनों की नहरबंदी का निर्णय लिया है।
नर्मदा नहर परियोजना (वृत्त-प्रथम, सांचौर) के अधीक्षण अभियंता बाबूलाल गहलोत ने बताया कि यह निर्णय नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की उप-समिति और सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड, गांधीनगर के बीच हुई आपसी सहमति के बाद लिया गया है।

क्यों जरूरी है नहरबंदी?
नर्मदा मुख्य नहर के गुजरात और राजस्थान दोनों भागों में लंबे समय से सिल्ट सफाई और तकनीकी मरम्मत की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। विभाग के अनुसार:
- सिल्ट सफाई: नहर के तल में जमी मिट्टी को हटाना अनिवार्य है ताकि जल प्रवाह की गति और क्षमता बनी रहे।
- भविष्य की सुरक्षा: गर्मियों के पीक सीजन से पहले मरम्मत कार्य होने से भविष्य में निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।
- सिस्टम अपडेट: नहर की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए स्ट्रक्चरल रिपेयरिंग का काम भी इसी अवधि में किया जाएगा।
20 दिन में भरने होंगे पेयजल स्टोरेज: जलदाय विभाग को चेतावनी
नहरबंदी का सबसे बड़ा असर पेयजल व्यवस्था पर पड़ सकता है। इसे देखते हुए अधीक्षण अभियंता ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं।
निर्देश: अगले 20 दिनों के भीतर सभी पेयजल स्टोरेज और डिग्गियों को उनकी पूर्ण क्षमता तक भर लिया जाए। ताकि नहरबंदी के दौरान आमजन को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना न पड़े।
किसानों और पशुपालकों पर पड़ेगा असर
नर्मदा बेल्ट के किसानों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं होने से खेतों में खड़ी फसलों के प्रबंधन और पशुओं के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक बड़ा कार्य होगा। प्रशासन ने किसानों से भी अपील की है कि वे पानी का मितव्ययिता से उपयोग करें और अपनी जरूरतों के अनुसार पूर्व तैयारी रखें।







पाठक टिप्पणियां (Comments)
0 टिप्पणियां