भामाशाह कल्याण सिंह देवल की प्रेरणादाई पहल से राजकीय विद्यालय में गूंजी खुशियां, शिक्षा के दीप को मिला समाज का संबल
शिक्षा केवल किताबों का ज्ञान नहीं, बल्कि समाज के प्रति दायित्व और सहयोग का सुंदर संगम है। जब समाज के सामर्थ्यवान हाथ नौनिहालों के भविष्य को संवारने के लिए आगे आते हैं, तो शिक्षा की नींव और अधिक मजबूत हो जाती है। राजकीय प्राथमिक विद्यालय चार रास्ता तावीदर में आयोजित बैग वितरण समारोह ने इस भावना को चरितार्थ कर दिखाया, जहां हर बच्चे के चेहरे की चमक और उत्सुकता देखने लायक थी।

तावीदर। स्थानीय राजकीय प्राथमिक विद्यालय चार रास्ता तावीदर में अध्ययनरत विद्यार्थियों के चेहरे उस समय खुशी से खिल उठे, जब उन्हें नए और उच्च गुणवत्तायुक्त बैग उपहार स्वरूप प्राप्त हुए। यह पुनीत कार्य गांव के ही भामाशाह कल्याण सिंह / चेतन सिंह जी देवल तावीदर की प्रेरणादाई पहल से संभव हो सका।
कार्यक्रम के दौरान भामाशाह कल्याण सिंह देवल द्वारा विद्यालय में नामांकित समस्त बालक-बालिकाओं को उच्च गुणवत्ता युक्त बैग वितरित किए गए। नए बैग पाकर नन्हें विद्यार्थियों के चेहरे पर नई उमंग और पढ़ाई के प्रति नया उत्साह साफ नजर आया। इस अवसर पर संस्था प्रधान वचनाराम वाणिका ने भामाशाह का हृदय से आभार प्रकट करते हुए कहा कि समाज के सहयोग से ही सरकारी विद्यालयों का विकास और बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव है। भामाशाहों का यह योगदान अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनता है।

विद्यालय के शिक्षक रामलाल गुर्जर ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की भामाशाहीय व्यवस्था और सहयोग से विद्यार्थियों में विद्यालय के प्रति आकर्षण बढ़ता है। यह पहल बच्चों के नियमित ठहराव और नए नामांकन की वृद्धि में अत्यंत सहायक सिद्ध होती है। जब बच्चों को सभी आवश्यक सुविधाएं मिलती हैं, तो उनके सीखने की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बन जाती है।
इस गरिमामय कार्यक्रम में संस्था प्रधान वचनाराम वाणिका, शिक्षक रामलाल गुर्जर, हितेश कुमार, भामाशाह कल्याण सिंह, कृपाल सिंह, पूर्व सरपंच प्रतिनिधि कृष्ण कुमार देवासी, बंटूसिंह, शेरसिंह, राजूराम भील सहित अनेक ग्रामीण व अभिभावक उपस्थित रहे। सभी ग्रामीणों ने भामाशाह के इस सराहनीय कदम की प्रशंसा की और विद्यार्थियों को मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया।
ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी विद्यालयों में इस प्रकार का जनसहयोग यह साबित करता है कि जब विद्यालय और समाज एक साथ कदम बढ़ाते हैं, तो शिक्षा का दीपक हर घर को रोशन कर सकता है। भामाशाहों की ऐसी ही सहभागिता से आने वाले समय में न केवल नामांकन बढ़ेगा, बल्कि हर बच्चा अपने सपनों की उड़ान भरने के लिए तैयार हो सकेगा।









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