जोधपुर रेंज पुलिस ने एक बार फिर अपराधियों के दिलों में खौफ पैदा कर दिया। पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार के नेतृत्व में साइक्लोनर टीम ने दो दिन में दो दमदार ऑपरेशन, अस्मिताभ्रम और भलालदेव, चलाकर 65,000 रुपये के इनामी अपराधियों को धर दबोचा। एक अपराधी ने हत्या की सनसनीखेज वारदात को अंजाम देकर दो साल तक पुलिस को चकमा दिया, तो दूसरा नशे के कारोबार में डूबकर समाज को तबाह करने में जुटा था। साइक्लोनर टीम ने इन दोनों को न सिर्फ पकड़ा, बल्कि अपराध की गहरी जड़ों को उखाड़ने का जज्बा भी दिखाया।
ऑपरेशन अस्मिताभ्रम: हत्यारे विष्णु की पहचान का भ्रम टूटा
गलत पहचान में श्याम की हत्या, दो साल तक फरार रहा विष्णु
विष्णु उर्फ ठेकेदार, पुत्र पप्पाराम, चिरढ़ाणी, पीपाड़ का रहने वाला, दो साल से हत्या के मामले में फरार था। इस शातिर अपराधी ने अपने साथियों के साथ मिलकर चेराई गांव में एक स्टोन कटर मालिक को सबक सिखाने की साजिश रची थी। लेकिन, पहचान के भ्रम में पड़कर उन्होंने गलती से श्याम पालीवाल की चाकू घोंपकर हत्या कर दी। इस जघन्य वारदात के बाद विष्णु अपने साथियों के साथ फरार हो गया। उसके साथी तो पिछले तीन साल में एक-एक कर पकड़े गए, लेकिन विष्णु अपनी पहचान बदलकर पुलिस को गच्चा देता रहा। कभी कमठा मजदूर, कभी कपड़े की दुकान पर सेल्समैन, तो कभी विद्यार्थी बनकर उसने जयपुर की गलियों में फरारी काटी।
साइक्लोनर ने उतारा शराफत का मुखौटा
पुलिस ने विष्णु की गिरफ्तारी के लिए 40,000 रुपये का इनाम घोषित किया था। आठ महीने की अथक मेहनत के बाद साइक्लोनर टीम को एक अहम सुराग मिला। हत्याकांड में शामिल एक अन्य आरोपी का भाई, जिसे विष्णु जयपुर में कानूनी सलाह देता था, पुलिस की नजर में आया। साइक्लोनर ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखी और पता चला कि वह बार-बार जौहरी बाजार जाता है। सिविल कपड़ों में ग्राहक बनकर पहुंची साइक्लोनर टीम ने जौहरी बाजार की एक कपड़े की दुकान से विष्णु को दबोच लिया। दुकान के मालिक को जब पता चला कि उनका मधुर व्यवहार वाला कर्मचारी एक इनामी हत्यारा है, तो उनके होश उड़ गए।

पत्नी को भी रखा अंधेरे में
विष्णु ने न सिर्फ पुलिस, बल्कि अपनी पत्नी को भी धोखे में रखा। दो साल की फरारी में वह सिर्फ एक बार चुपके से घर गया, वो भी रात के अंधेरे में। उसकी पत्नी को न तो उसका ठिकाना पता था, न ही उसकी हरकतें। साइक्लोनर टीम कई बार उसकी पत्नी के पीहर तक पहुंची, लेकिन बेचारी को कुछ नहीं पता था। अब विष्णु जेल की सलाखों के पीछे है, और उसकी पत्नी को यह भी नहीं समझ आ रहा कि खुश हो या दुखी।
ऑपरेशन भलालदेव: नशे के सौदागर भैरूलाल का खेल खत्म
डोडा तस्करी की फैक्ट्री बनाई थी भैरूलाल ने
चित्तौड़गढ़ के निम्बाहेड़ा का भैरूलाल देवासी, पुत्र मांगीलाल, लंबे समय से मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त था। उसने पढ़ाई छोड़कर मांगरोल की सीमेंट फैक्ट्री में ट्रैक्टर चलाना शुरू किया। वहां मजदूरों को डोडा सप्लाई करके उसने छोटे-मोटे पैसे कमाए। धीरे-धीरे उसका धंधा बढ़ा और वह क्विंटलों में डोडा सप्लाई करने लगा। एक बार निम्बाहेड़ा सदर पुलिस ने उसे दो क्विंटल डोडा के साथ पकड़ा, लेकिन जेल में उसकी मुलाकात हनुमान नाम के एक तस्कर से हुई। दोनों ने मिलकर जेल से ही डोडा तस्करी का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया।
हनुमान से हनुमान तक की कूद
बाहर आने के बाद भैरूलाल ने बाड़मेर के एक हनुमान के साथ मिलकर तस्करी शुरू की। जब वह पकड़ा गया, तो उसने हनुमान के भाई के साथ धंधा चलाया। फिर ज्यादा मुनाफे के लालच में उसने बाड़मेर के ही एक अन्य हनुमान से हाथ मिला लिया। इस नई जोड़ी ने बड़े पैमाने पर डोडा तस्करी शुरू की, लेकिन पुराने हनुमान के भाई को यह बात नागवार गुजरी। ईर्ष्या में उसने बाड़मेर के आर.जी.टी. थाना क्षेत्र में भैरूलाल की बड़ी खेप पकड़वा दी। भैरूलाल पर 25,000 रुपये का इनाम घोषित हुआ, लेकिन वह बार-बार स्थानीयता का फायदा उठाकर बचता रहा।
खाटू श्याम ने दिया ‘आराम’
लंबे समय तक भागते-भागते थक चुके भैरूलाल ने मानसिक शांति के लिए खाटू श्याम बाबा की शरण ली। लेकिन, पुराने हनुमान का भाई उसकी हर हरकत पर नजर रखे था। जैसे ही उसे पता चला कि भैरूलाल खाटू श्याम जा रहा है, उसने साइक्लोनर टीम को सूचना दी। भैरूलाल रींगस से ट्रेन पकड़कर घर लौटने की फिराक में था, लेकिन फुलेरा जंक्शन पर साइक्लोनर टीम ने उसे दबोच लिया। खाटू श्याम ने भैरूलाल के मन को शांति दी या नहीं, यह तो पता नहीं, लेकिन उसके कदमों को जेल की चारदीवारी में जरूर ‘आराम’ दे दिया।
साइक्लोनर की शानदार रणनीति और विकास कुमार का नेतृत्व
पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार की अगुवाई में साइक्लोनर टीम ने एक बार फिर साबित कर दिखाया कि अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, वह उनके शिकंजे से बच नहीं सकता। विकास कुमार ने बताया कि साइक्लोनर, टॉरनेडो और स्ट्रॉन्ग जैसी विशेष टीमें जोधपुर रेंज के चार जिलों की निगरानी करती हैं। इनके गठन का मकसद नशे के कारोबार को जड़ से उखाड़ना और समाज को अपराधमुक्त करना है।
ऑपरेशन का नामकरण: रचनात्मक और रणनीतिक
- ऑपरेशन अस्मिताभ्रम: विष्णु ने गलत पहचान के भ्रम में श्याम की हत्या की और खुद भी पहचान बदलकर पुलिस को भटकाता रहा। इस भ्रम को तोड़ने के लिए ऑपरेशन का नाम ‘अस्मिताभ्रम’ रखा गया।
- ऑपरेशन भलालदेव: भैरूलाल के नाम से ‘भ’ और ‘लाल’ व ‘देवासी’ से ‘देव’ लेकर ‘भलालदेव’ नाम रखा गया, जो उसके नशे के कारोबार की विशालता को दर्शाता है।
साइक्लोनर टीम की मेहनत और समर्पण
इस कार्रवाई में साइक्लोनर टीम के उपनिरीक्षक कन्हैयालाल, नेमाराम, प्रमीत चौहान, देवाराम विश्नोई, हेड कांस्टेबल महेन्द्र कुमार, महिपाल सिंह, कांस्टेबल अशोक कुमार, राकेश, मनीष परमार, शेखरचन्द, गोपाल जाणी, रोहिताश कुमार और घासीलाल शामिल थे। विशेष रूप से कांस्टेबल शेखरचन्द, गोपाल जाणी और झुमरराम की भूमिका सराहनीय रही। विकास कुमार ने घोषणा की कि इस शानदार कार्रवाई के लिए पूरी टीम को जोधपुर रेंज कार्यालय में विशेष समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
विकास कुमार: अपराधियों में खौफ का पर्याय
विकास कुमार ने जोधपुर रेंज में अपराधियों के खिलाफ जिस तरह का अभियान छेड़ा है, उससे अपराधी थर-थर कांप रहे हैं। उनकी साइक्लोनर टीम ने 400 दिनों में 18 राज्यों में 101 ऑपरेशन चलाकर 21 लाख रुपये के 122 इनामी अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया है। चाहे पेपर लीक के मास्टरमाइंड हों या नशे के सौदागर, साइक्लोनर टीम ने हर बार अपनी रणनीति और साहस से अपराधियों को धूल चटाई है। विकास कुमार की यह मुहिम न सिर्फ जोधपुर, बल्कि पूरे राजस्थान में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने का प्रतीक बन चुकी है।



