भीमगुडा के किसानों का आरोप- 'कमीशन' नहीं दिया तो पटवारी ने निकाल दी खुन्नस, गिरदावरी में खेल कर मुआवजे से किया वंचित
चितलवाना/जालोर। अपनी हकों की लडाई लड रहे भीमगुडा हलके के किसानों का आक्रोश रविवार को फूट पडा। पिछले चार दिनों से चल रहे धरने ने रविवार को उग्र रूप ले लिया, जब 10 गांवों के करीब 800 किसान 110 ट्रैक्टर और 50 अन्य वाहनों के साथ खेती-किसानी के औजार लेकर चितलवाना उपखंड मुख्यालय पहुँच गए। प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए किसानों ने अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान कर दिया है।

इस आंदोलन को अब संयुक्त किसान मोर्चा ने भी अपना पूर्ण समर्थन दे दिया है। मौके पर संयुक्त किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष व राजस्थान किसान सभा के जिला अध्यक्ष विरद सिंह चौहान और कोषाध्यक्ष धीमाराम खिलेरी ने धरने को संबोधित करते हुए प्रशासन को चेताया।
क्या है पूरा मामला: 'कमीशन' का खेल और बदले की कार्रवाई
किसानों ने पटवारी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। ज्ञापन के अनुसार, पटवार हल्का भीमगुडा के किसानों का आरोप है कि पटवारी ने जानबूझकर खरीफ 2025 की गिरदावरी में 'गलत रिपोर्ट' तैयार की है।
किसानों का कहना है कि रबी सीजन 2024 में फसल खराबे के बीमा क्लेम का 20 प्रतिशत हिस्सा पटवारी ने मांगा था, जिसे देने से किसानों ने इनकार कर दिया था। आरोप है कि इसी का 'बदला' लेने की नीयत से पटवारी ने इस बार अतिवृष्टि और तूफान से फसलें नष्ट होने के बावजूद गिरदावरी में 0 प्रतिशत खराबा दिखाया, जबकि पडौसी हलकों (डुगरी, सुराचन्द, टापी) में 40 से 100 प्रतिशत तक खराबा दर्ज हुआ है। पटवारी की इस 'हठधर्मिता' के कारण भीमगुडा के 10 गांवों का नाम आदान अनुदान सूची से गायब है।
संयुक्त किसान मोर्चा की हुंकार: न्याय मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष
धरने को संबोधित करते हुए किसान नेता विरद सिंह चौहान ने कहा कि अन्नदाता के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार राहत की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ पटवारी जैसे कर्मचारी अपने निजी स्वार्थ और द्वेष के चलते किसानों के पेट पर लात मार रहे हैं।
ये हैं प्रमुख मांगें
- पटवार हल्का भीमगुडा को तुरंत प्रभाव से कृषक आदान अनुदान सूची में शामिल किया जाए।
- द्वेषतापूर्ण कार्रवाई करने वाले पटवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर मुख्यालय जालोर किया जाए ताकि जांच प्रभावित न हो।
प्रशासन की सांसे फूली
सैकडों की तादाद में ट्रैक्टरों के साथ पहुंचे किसानों के प्रदर्शन से उपखंड मुख्यालय पर गहमागहमी बढ गई है। किसानों ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक वे घर नहीं लौटेंगे और अब भूख हडताल व आमरण अनशन जैसा कडा कदम उठाने को मजबूर होंगे।







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