रेवदर के रोही में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: पुलिस ने गुजरात के 12 रईसजादों समेत 23 को दबोचा, लेकिन फार्महाउस मालिक और मददगार पुलिसकर्मी को लेकर एसपी के जवाब पर उठे सवाल
सिरोही/रेवदर @ सर्कल न्यूज नेटवर्क सिरोही जिले के रेवदर थाना क्षेत्र में पुलिस ने अब तक की सबसे बडी कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय ऑनलाइन सट्टा गिरोह का पर्दाफाश तो कर दिया, लेकिन अब यही कार्रवाई पुलिस के गले की फांस बनती जा रही है। रोही गांव के एक कृषि कुएं (फार्महाउस) पर चल रहे इस हाईप्रोफाइल जुए में पुलिस ने राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के 23 लोगों को गिरफ्तार किया है।
लेकिन असली बखेडा तब खडा हुआ जब उस ‘कुएं’ के मालिक का नाम सामने आया। आरोप है कि यह ठिकाना भाजपा के एक पूर्व विधायक से जुडा है, जिसे बचाने के लिए पुलिस लीपापोती में जुट गई है।
सियासी भूचाल: कुआं पूर्व विधायक का, फिर एसपी अनजान क्यों? ‘सच बेधडक’ और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, रोही गांव का वह कृषि कुआं कथित तौर पर भाजपा के पूर्व विधायक जगसीराम कोली से जुडा बताया जा रहा है।

- एसपी का अजीब बयान: जब इस बारे में सिरोही एसपी से सवाल किया गया, तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड लिया कि “कुआं किराए का था, मालिक की जानकारी नहीं है।” जबकि पूरा रेवदर क्षेत्र जानता है कि वह कुआं किसका है।
- नेताओं का हमला: विधायक मोतीराम कोली और संयम लोढा ने पुलिस की निष्पक्षता पर सीधे सवाल दागे हैं। उनका कहना है कि क्या कानून सिर्फ सटोरियों तक सीमित है? नेताओं के लिए कोई कानून नहीं है?।

खाकी का ‘विभीषण’: पुलिसकर्मी ने ही दी थी पनाह! इस कांड में सबसे चौंकाने वाला पहलू पुलिस विभाग के ही एक कर्मचारी की भूमिका है। खबरों के मुताबिक, एक पुलिसकर्मी ने ही सट्टा किंग को यह कुआं किराए पर दिलवाया था। पहले यह कारोबार जसवंतपुरा के एक होटल में चल रहा था, वहां से भगाकर इन्हें रोही गांव में सेटल करने वाला भी वही पुलिसकर्मी बताया जा रहा है।
पर्दाफाश: 5 लैपटॉप, 43 मोबाइल और लाखों का हिसाब सिरोही एसपी के नेतृत्व में रेवदर पुलिस और स्पेशल टीम ने जब आधी रात को रेड मारी, तो वहां हाईटेक तरीके से सट्टा चल रहा था। पुलिस ने मौके से 5 लैपटॉप, 43 मोबाइल फोन, 23 कैलकुलेटर, वाई-फाई सेटअप और 47,930 रुपए नकद बरामद किए। साथ ही करोडों के हिसाब-किताब वाली डायरियां भी जब्त की गईं।

ये हैं वो 12 रईसजादे (गुजरात कनेक्शन) गिरफ्तार किए गए 23 आरोपियों में से 12 गुजरात के अलग-अलग जिलों के बडे नाम हैं। इनके नाम और पते इस प्रकार हैं:
- भालचंद्र उर्फ नानुभाई पटेल (61): 13, राजयश रीच मोल्ड, जयंतीलाल पार्क, बोपल-आंबली रोड, अहमदाबाद।
- विपुलकुमार पटेल (61): 2-बी, जलकमल सोसायटी, शाहपुर दरवाजा बाहर, अहमदाबाद।
- अमित लालाणी (49): 82, रणछोडजी गली, पुरानी पोस्ट ऑफिस के पास, जूना असારવા, अहमदाबाद।
- अल्पेश प्रजापति (48): मकान नं. 1950, नानी हवेली की पोल, दरियापुर, अहमदाबाद।
- मनोज गोर (51): 265, गली नं-10, आरटीओ कॉलोनी, माधापर, भुज (कच्छ)।
- बज्जू रबारी (38): कॉमर्स कॉलेज के पीछे, हनुमान गली, माधापर, भुज (कच्छ)।
- मेजा माला रबारी (49): देवपरगढ रबारी वास, मांडवी (कच्छ)।
- पंचाण रबारी (32): देवपरगढ रबारी वास, मांडवी (कच्छ)।
- रवजी रबारी (25): मोमाई मां मंदिर के पास, देवपरगढ, मांडवी (कच्छ)।
- कल्पेश राजगोर (48): 7/20, पंचवटी सोसायटी, मोगरावाडी, वलसाड।
- अमित पंचाल (38): 119, होमदर्शन कॉम्प्लेक्स, लाखुखाड महादेव मंदिर के पास, पाटन।
- भावेश सुथार (26): रामपुरा, भीलडी, बनासकांठा।

बडा सवाल पुलिस ने प्यादों को तो पकड लिया है, लेकिन सवाल अब भी वही है- क्या पुलिस उस रसूखदार ‘मालिक’ और अपने विभाग के उस ‘दागी कर्मचारी’ पर हाथ डालने की हिम्मत दिखाएगी जिसने इस काले कारोबार को संरक्षण दिया था?



