सांचौर/चितलवाना। किसानों की लंबित समस्याओं के समाधान के लिए अब रणभूमि तैयार है। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले कल सोमवार, 27 अक्टूबर को सांचौर, चितलवाना और आस-पास के क्षेत्रों से भारी तादाद में किसान चितलवाना में एकजुट होकर ‘महापड़ाव’ करेंगे। यह महापड़ाव मुख्य रूप से बकाया सरकारी अनुदान और फसल बीमा कंपनी की मनमानी के खिलाफ एक शक्ति प्रदर्शन होगा।
ये हैं किसानों की मुख्य माँगे:
संयुक्त किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष ईशराराम बिश्नोई ने सर्कल न्यूज़ नेटवर्क को बताया कि किसानों को लंबे समय से निम्नलिखित गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिनके समाधान के लिए यह महापड़ाव अनिवार्य हो गया है:
- बकाया आदान अनुदान राशि: चितलवाना तहसील के किसानों की बड़ी संख्या में बकाया आदान अनुदान राशि अभी तक जारी नहीं की गई है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
- फसल बीमा क्लेम में मनमानी: किसानों ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत रिलायंस कंपनी द्वारा भारी नुकसान के बावजूद जानबूझकर क्लेम निरस्त कर दिए जाते हैं। किसानों के साथ यह धोखा तत्काल बंद होना चाहिए।
- नहरों की दुर्दशा: रबी की सिंचाई शुरू हो चुकी है, लेकिन सिंचाई विभाग की घोर लापरवाही के चलते नहरों और वितरिकाओं की आज दिन तक न तो सफाई हुई है और न ही मरम्मत और झाड़ी कटिंग। इससे किसानों को उनके हिस्से का पूरा पानी मिलने में बाधा आ रही है।
- बिजली विभाग के मुद्दे: किसानों को स्मार्ट मीटर लगाने सहित बिजली विभाग से जुड़ी अन्य समस्याओं को लेकर भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अधिकाधिक संख्या में आने का आह्वान:
मोर्चा के जिला अध्यक्ष ईशराराम बिश्नोई और जिला मंत्री मकारम चौधरी ने चितलवाना तहसील और आस-पड़ोस के सभी किसानों से इस निर्णायक महापड़ाव में अधिकाधिक संख्या में भाग लेने का आह्वान किया है। नेताओं ने कहा कि एकजुट होकर ही हम सरकार और कंपनियों को अपनी माँगे मानने के लिए बाध्य कर सकते हैं।
कल का दिन निर्णायक:
जानकारों का मानना है कि यह महापड़ाव स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए एक कड़ी चुनौती साबित होगा। संयुक्त किसान मोर्चा की यह संगठनात्मक शक्ति यह दर्शाएगी कि किसान अपनी मूलभूत आवश्यकताओं और अधिकारों को लेकर अब किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं हैं।



