रानीवाड़ा। मारवाड़ की तपती धरा पर इस दफा मेघों की बेरुखी ने अन्नदाता की कमर तोड़ कर रख दी है। क्षेत्र में खरीफ सीजन के दौरान पर्याप्त बारिश न होने के चलते खेतों में लहलहाने वाली उम्मीदें दम तोड़ चुकी हैं। खेत-खलिहानों में पसरे सन्नाटे और मवेशियों के सामने गहराते चारे-पानी के गंभीर संकट को देखते हुए क्षेत्र के किसानों का सब्र अब जवाब दे गया है। किसान हितैषी अधिवक्ता ललित राजपुरोहित के नेतृत्व में किसानों के एक शिष्टमंडल ने रानीवाड़ा तहसील को तत्काल पूर्ण सूखा व अकालग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर सूबे के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम उपखंड अधिकारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में जालोर जिले और खासतौर पर रानीवाड़ा क्षेत्र के बिगड़ते जमीनी हालातों का हवाला देते हुए बताया गया कि इंद्रदेव की बेरुखी से खरीफ की अधिकांश फसलें पूरी तरह सूखकर नष्ट हो चुकी हैं। इस प्राकृतिक आपदा की मार से गरीब, लघु एवं सीमांत किसान कर्ज और तंगहाली के भंवर में फंस गए हैं।
राहत के लिए रखीं प्रमुख मांगें:
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चारा डिपो व पशुधन पेंशन: गांवों में मूक पशुधन को भुखमरी से बचाने के लिए प्रत्येक राजस्व सर्किल मुख्यालय पर रियायती दर का सूखा चारा डिपो तुरंत खोला जाए। साथ ही, पशुपालकों को संबल देने के लिए पशु संख्या के अनुपात में आगामी 10 माह की विशेष पशुपालन पेंशन जारी की जाए।
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फसल बीमा व डीबीटी अनुदान: बीमा कंपनियों की पेचीदगियों के चलते फसल बीमा के लाभ से वंचित रहे किसानों को भूमि रकबे (क्षेत्रफल) के हिसाब से वर्ष 2026 की खरीफ अनुदान राशि सीधे बैंक खातों में (DBT) अंतरित की जाए।
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सर्किल स्तर पर नंदी गौशालाएं: सड़कों पर घूमते बेसहारा गोवंश के कारण आए दिन हो रही प्राणघातक सड़क दुर्घटनाओं को थामने और खेतों में बची-खुची हरियाली की हिफाजत के लिए हर सर्किल पर नंदी गौशाला की स्थापना हो। इसके अलावा भू-जल संचयन और कटाव रोकने के लिए नदियों में नाला-नसबंदी का कार्य प्राथमिकता से करवाया जाए।
वन्यजीवों के आतंक से मुक्ति और युवाओं को मिले रोजगार
ज्ञापन में वन विभाग की खाली पड़ी भूमि पर मजबूत तारबंदी (फेंसिंग) करवाकर वहां सघन पौधारोपण और पानी के पक्के कुंड बनाने की मांग उठाई गई, ताकि रोजड़े (नीलगाय), जंगली सूअर और बंदर रिहायशी व कृषि क्षेत्रों की बजाय जंगल में ही रहें। किसानों ने सुझाव दिया कि फसलों को नुकसान से बचाने और वन्यजीवों की समुचित सार-संभाल के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर 15-15 स्थानीय युवाओं को विशेष रेस्क्यू प्रशिक्षण दिया जाए और उन्हें संविदा के आधार पर सरकारी सेवा में नियोजित कर त्वरित रेस्क्यू दल गठित किए जाएं।
राजस्व तंत्र में कसावट: बने परमानेंट टीम, हो ऑनलाइन ट्रैकिंग
जमीन से जुड़े मुकदमों में किसानों को वर्षों तक चक्कर काटने से निजात दिलाने के लिए राजस्व अदालतों से आने वाले निर्णयों व अमल-दरामद की ऑनलाइन पोर्टल के जरिए सख्त ट्रैकिंग की मांग की गई। साथ ही रास्ते खुलवाने, पत्थरगढ़ी, सीमांकन और सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने जैसी कार्रवाई को बिना देरी अंजाम देने के लिए तहसील स्तर पर एक सक्षम राजस्व निरीक्षक (RI) की अगुवाई में पर्याप्त जाब्ते व संसाधनों से लैस 'परमानेंट राजस्व कार्यदल' तैनात करने पर जोर दिया गया।
ज्ञापन सौंपने के दौरान एडवोकेट ललित राजपुरोहित, डूंगरी सरपंच जबराराम पुरोहित, सूरजवाड़ा सरपंच कृष्ण राजपुरोहित, रमेश आंजणा, पूर्व सरपंच कांतिलाल पुरोहित, लच्छाराम, लीलाराम सहित बड़ी तादाद में क्षेत्र के जागरूक किसान और ग्रामीण मौजूद रहे। किसानों ने दो-टूक कहा कि यदि शासन-प्रशासन ने जल्द ही रानीवाड़ा को सूखाग्रस्त घोषित कर राहत पैकेज का ऐलान नहीं किया, तो ग्रामीण क्षेत्र में आंदोलन की राह पकड़ने को मजबूर होंगे।







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