रानीवाड़ा (जालोर)।
सर्कल न्यूज नेटवर्क
आधुनिकता की चकाचौंध के बीच अपनी गौरवशाली परंपरा, संस्कृति और संस्कारों को संजोए रखने का अनूठा दृश्य इन दिनों आजोदर गांव में देखने को मिल रहा है। तहसील क्षेत्र के आजोदर स्थित यूआर गर्ल्स कॉलेज परिसर में क्षत्रिय युवक संघ के तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय मातृशक्ति प्रशिक्षण शिविर में बालिकाओं को जीवन जीने की कला और अनुशासन की सीख दी जा रही है। शिविर में अंचल भर से जुटीं 185 मातृशक्तियां पूर्ण मनोयोग से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।
भोर की पहली किरण के साथ जागरण
शिविर में दिनचर्या की शुरुआत भोर के चार बजते ही प्रेरणादायी जागरण गीत के साथ होती है। इसके पश्चात निर्धारित समय-सारणी के अनुसार शारीरिक व्यायाम, खेलकूद, ध्यान और प्रार्थना के क्रम चलते हैं। रात दस बजे दीप विश्राम तक पूरा परिसर एक अनुशासित गुरुकुल की भांति नजर आता है। शिविर की कठोर किंतु संस्कारमयी दिनचर्या के जरिए बालिकाओं में समय प्रबंधन, स्वावलंबन और सामूहिक जीवन के प्रति निष्ठा का भाव भरा जा रहा है।
बौद्धिक सत्रों में व्यक्तित्व निर्माण का पाठ
शिविर प्रमुख रश्मि कंवर देलदरी ने बताया कि संघ की कार्यप्रणाली के केंद्र में व्यक्ति निर्माण और संस्कार ही मुख्य आधार हैं। समाज और राष्ट्र की धुरी मातृशक्ति है, इसलिए उसके बौद्धिक, मानसिक और नैतिक उत्थान के लिए संघ समय-समय पर ऐसे शिविरों का आयोजन करता है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान रोचक बौद्धिक सत्रों, नीतिपरक प्रवचनों और पारंपरिक प्रेरक खेलों के जरिए बालिकाओं को नेतृत्व क्षमता, शिष्टाचार, परिवार व समाज के प्रति दायित्वों का बोध कराया जा रहा है।
सामूहिकता से जागृत हो रहा आत्मविश्वास
चार दिनों तक चलने वाले इस शिविर में सभी संभागियों के लिए एक समान नियम, सामूहिक भोजन और परस्पर सहयोग की परंपरा अनिवार्य की गई है। शिविर में भाग ले रहीं बालिकाओं का कहना है कि यहां की दिनचर्या उन्हें न केवल शारीरिक रूप से मजबूत बना रही है, बल्कि जीवन में आने वाली हर परिस्थिति का सामना संयम और आत्मविश्वास के साथ करने का संबल भी दे रही है। शिविर के दौरान कॉलेज परिसर संघमयी वातावरण और राष्ट्रभक्ति के गीतों से गुंजायमान नजर आ रहा है।







पाठक टिप्पणियां (Comments)
0 टिप्पणियां