चितलवाना (जालौर), 13 अगस्त।
डूंगरी GSS से जुड़े हजारों उपभोक्ताओं ने सरकार और बिजली विभाग पर सीधा मोर्चा खोल दिया है। दो दिन से धरना जारी है, लेकिन न कोई अफसर आया, न समाधान की कोशिश।
विद्युत उपभोक्ता संघर्ष समिति डूंगरी के नेतृत्व में 12 अगस्त से शुरू हुआ आंदोलन मंगलवार को भी तेज़ रहा। किसानों का आरोप है कि 8 घंटे की कृषि बिजली और 18 घंटे की घरेलू आपूर्ति का वादा खोखला है—गांव में सिर्फ 1–2 घंटे कम वोल्टेज की बिजली मिल रही है, वह भी बार-बार कटौती के साथ। कम वोल्टेज से घरेलू उपकरण जल गए और खेतों में खड़ी फसल बर्बाद हो चुकी है।

ग्रामीणों ने बिजली विभाग पर खुलेआम भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि नए कृषि और घरेलू कनेक्शन के लिए ठेकेदार पोल खड़ा करने, तार खींचने, मीटर लगाने तक हर काम में रिश्वत वसूल रहे हैं। मांग है कि यह धंधा बंद हो और कनेक्शन समय पर मिले। साथ ही कृषि कनेक्शन की वेटिंग लिस्ट GSS पर सार्वजनिक की जाए।
धरनाकारियों ने GSS डूंगरी की FRT टीम और मौजूदा स्टाफ के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया। आरोप है कि उनका व्यवहार, बातचीत और काम करने का तरीका उपभोक्ताओं के प्रति दुश्मनी जैसा है। मांग है कि पूरे स्टाफ को हटाकर नया स्टाफ लगाया जाए।
धरना स्थल से गुस्साई चेतावनी दी गई – अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन उग्र होगा—बाजार बंद, हाईवे जाम, आमरण अनशन और आक्रामक कदम उठाए जाएंगे। अगर कानून-व्यवस्था बिगड़ी तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
संयुक्त किसान मोर्चा सांचौर ने भी इस लड़ाई में खुला समर्थन देते हुए कहा कि “किसान अब चुप नहीं बैठेंगे।”



