जालोर | यह बात सच है की लाख मुश्किलातो के बावजूद इंसान चाहे तो अपने सपनों को सच कर सकता है। हम आज डाॅ. भागीरथ राम परिहार की सक्सेस स्टोरी का जिक्र करने जा रहे है | डाॅ. भागीरथ राम परिहार, राजस्थान के जालौर जिले के रानीवाड़ा के चिमनगढ़ गांव के एक साधारण परिवार के बेटे, आज अपनी मेहनत और लगन से चिकित्सा के क्षेत्र में चमकता सितारा बन गए हैं। उनकी सफलता की कहानी प्रेरणादायक और उल्लेखनीय है, जिसमें चिमनगढ़ से भारत के प्रतिष्ठित PGIMER चंडीगढ़ तक की यात्रा शामिल है।

शैक्षणिक उपलब्धियां और करियर का सफर
डाॅ. भागीरथ ने प्राथमिक शिक्षा प्राथमिक आदर्श विद्यालय रानीवाड़ा, गुरुकुल पथमेड़ा और माध्यमिक शिक्षा हैप्पी स्कूल और राजकीय सीनियर सैकंडरी स्कूल रानीवाड़ा में पूरी की। स्कूली दिनों से ही उनका झुकाव शिक्षा और विज्ञान के प्रति था। उन्होंने अपनी एमबीबीएस की डिग्री 85% अंकों के साथ पूरी की। इसके अलावा, संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज, जोधपुर में भी एक वर्ष तक सेवाएँ प्रदान कीं।
इसके बाद सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर से एमडी रेडियोडायग्नोसिस की डिग्री हासिल की। उन्होंने NEET PG परीक्षा में राजस्थान में 24वां स्थान प्राप्त किया और उस समय जालौर जिले में पहले स्थान पर रहे। अभी उनका नाम राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित प्रतिष्ठित PGIMER चंडीगढ़ में चौथे स्थान पर भी आया, जिससे उनकी प्रतिभा की व्यापक पहचान हुई।

पेशेवर अनुभव
डाॅ. भागीरथ ने राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित मेडिकल ऑफिसर भर्ती परीक्षा 65% अंकों के साथ पास की। उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), बड़गांव तहसील रानीवाड़ा में कोचिकित्सा अधिकारी के रूप में सेवा दी। कोविड-19 महामारी में उनकी सेवाएँ ना केवल चिकित्सा के क्षेत्र में बल्कि समुदाय को प्रेरित करने में भी अहम भूमिका निभाती हैं।
वैश्विक पहचान और अनुसंधान
डाॅ. भागीरथ के रेडियोलॉजी और रेडियोडायग्नोसिस के क्षेत्र में किए गए शोध कार्यों को विश्व स्तर पर पहचान मिली है। उनके शोधपत्र अंतरराष्ट्रीय जर्नल जैसे International Journal of Scientific Research, International Society of Neuroradiology, और International Journal of Applied Research में प्रकाशित हो चुके हैं। यह उनकी वैज्ञानिक सोच और अनुसंधान में गहन रुचि का प्रमाण है।

चिमनगढ़ से PGIMER चंडीगढ़ तक
अब डाॅ. भागीरथ PGIMER चंडीगढ़ में सुपर स्पेशलिस्ट बनने की राह पर हैं। उनका सपना रेडियोलॉजी के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छूने का है। यह सफलता न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उनके गांव, जिले और राज्य के लिए भी गर्व का विषय है।

प्रेरणा की किरण
डाॅ. भागीरथ की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि कड़ी मेहनत, लगन और सही दिशा में प्रयास से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
उनकी यात्रा चिमनगढ़ से शुरू होकर चंडीगढ़ के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान तक पहुँची है। यह कहानी बताती है कि सपने सिर्फ देखे नहीं जाते, बल्कि उन्हें पूरा करने का साहस और मेहनत भी करनी होती है।

बता देते है की डाॅ. भागीरथ राम के पिताजी मंछा राम परिहार रानीवाडा क्षेत्र के माने हुए समाजसेवी है। अभी संत रामपाल महाराज के अनुयायी है और वो धर्म कर्म के कार्य में लगे हुए है।







पाठक टिप्पणियां (Comments)
0 टिप्पणियां