🔥 कड़क खबर! जालोर के हीरपूरा में 'जल जीवन' मिशन हुआ फेल: ग्रामीण टेंकर के भरोसे,
जालोर। रानीवाड़ा उपखंड के गांग ग्राम पंचायत का हीरपूरा गांव! यह वह जगह है, जहां आजादी के दशकों बाद भी पानी जैसी मूलभूत सुविधा एक सपना बनी हुई है। देश 'आज़ादी का अमृत महोत्सव' मना रहा है, लेकिन हीरपूरा की हकीकत यह है कि यहां के लोग आज भी महंगे दामों पर टेंकर मंगाकर अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं। यह सरकारी वादों और जमीनी हकीकत के बीच की वह चौंकाने वाली खाई है, जिसे देखकर कोई भी कह उठेगा: "हर घर नल, हर घर जल" का नारा शायद सिर्फ़ चुनावी जुमला था!
💧 संवेदनहीनता की हद: जल संकट में झुलसता हीरपूरा
- मूलभूत सुविधा से वंचित: गांग ग्राम पंचायत के हीरपूरा में एक बड़ी आबादी पानी की बूंद-बूंद को तरस रही है।
- निकम्मे साबित हुए जिम्मेदार: PHED विभाग, जल जीवन मिशन, उपखंड प्रशासन और ग्राम पंचायत के सरपंच व कर्मचारी—सभी संवेदनहीन हो चुके हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने बार-बार गुहार लगाई, अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ अनसुना किया गया।
- प्रशासन गहरी नींद में: बीते दिनों अवगत कराने के बावजूद, प्रशासन गहरी नींद में सोया हुआ है। हीरपूरा की जनता की सुध लेने वाला कोई नहीं है; उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।
🤬 सवाल: कब तक अनसुना करते रहोगे?
ग्रामीण पिछले कई सालों से इस अभाव में जूझ रहे हैं। यह स्थिति केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की अक्षमता का जीता-जागता प्रमाण है। जब सरकारें 'विकसित भारत' की बात करती हैं, तब जालोर के इस गांव का यह हाल तमाचा है उन सभी दावों पर!
स्थानीय ग्रामीण सिर्फ पानी मांग रहे हैं—यह उनका संवैधानिक अधिकार है।
सर्कल न्यूज़ नेटवर्क राजस्थान सरकार और संबंधित विभाग के मंत्री जी से यह कड़ा अनुरोध करता है कि हीरपूरा के लोगों की पीड़ा को समझा जाए, पानी की किल्लत को तुरंत दूर करने के लिए समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करवाई जाए। साथ ही, इस गंभीर लापरवाही के लिए ग्राम पंचायत से लेकर संबधित विभाग के लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
जिम्मेदारों, याद रखना: आपकी कुर्सी पर बैठने का मतलब सिर्फ नारे लगाना नहीं, बल्कि जमीन पर काम करना भी होता है!







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