“शिक्षा का अधिकार सिर्फ कागज़ों में नहीं चाहिए, स्कूल में टीचर चाहिए” – गांव के बच्चों की गुहार
रानीवाड़ा (जालोर)। रानीवाड़ा उपखंड की कोडका ग्राम पंचायत के सामराणी गांव स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी को लेकर आखिरकार सब्र का बाँध टूट गया। मंगलवार सुबह स्कूली छात्रों और उनके अभिभावकों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला जड़ते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। "जब तक शिक्षक नहीं, तब तक ताला नहीं खुलेगा" — इस नारों के साथ ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग और राज्य सरकार के खिलाफ ज़ोरदार नारेबाजी की।
गौरतलब है कि सोमवार को ग्रामीणों ने पीईओ को चेतावनी दी थी कि यदि स्कूल में आवश्यक स्टाफ की व्यवस्था नहीं की गई तो वे मंगलवार को तालाबंदी करेंगे। जवाब में विभाग की ओर से दो सहायक शिक्षकों की ड्यूटी डेपुटेशन पर लगाई गई, लेकिन ग्रामीण इससे संतुष्ट नहीं हुए। उनकी मुख्य मांग सेकंड ग्रेड शिक्षकों की नियुक्ति है, जो विषयवार पढ़ा सकें और छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार कर सकें।
छात्रों की पढ़ाई पर सीधा असर
वर्तमान में स्कूल में विज्ञान, गणित और अंग्रेज़ी जैसे विषयों के शिक्षक नहीं होने से छात्र–छात्राओं की पढ़ाई पूरी तरह चरमरा गई है। बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि हर दिन नुकसान हो रहा है, और परीक्षा नज़दीक होने के बावजूद उन्हें विषय विशेषज्ञों से मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा।
“शिक्षा का अधिकार, कागजों में क्यों?”
ग्रामीणों ने कहा कि शिक्षा का अधिकार संविधान द्वारा प्रदत्त मूलभूत अधिकार है, लेकिन जब स्कूल में शिक्षक ही नहीं होंगे तो इस अधिकार का कोई मतलब नहीं रह जाता। एक ओर सरकार शिक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च करने के दावे करती है, दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत यह है कि बच्चों को प्राथमिक स्तर पर भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही।
36 कौम एकजुट, सामाजिक माहौल गर्म
सामराणी गांव में आज का दिन एकता और असंतोष, दोनों का प्रतीक रहा। 36 कौम के लोग एकजुट होकर प्रदर्शन में शामिल हुए। छात्रों की नाराजगी के साथ-साथ उनके अभिभावकों का रोष भी साफ नज़र आया। प्रदर्शन स्थल पर महिलाएं, बुजुर्ग और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
प्रशासन मौन, समाधान अधर में
अब तक शिक्षा विभाग की ओर से इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया है। समाचार लिखे जाने तक धरना जारी था और ग्रामीणों ने साफ कहा है कि जब तक स्थायी शिक्षक नहीं लगाए जाते, तब तक स्कूल का ताला नहीं खुलेगा।
सर्कल न्यूज़ का कहना -
यह मामला केवल एक गांव का नहीं है — यह उन हजारों ग्रामीण स्कूलों की पीड़ा है, जहां शिक्षा नीति और नीयत के बीच झूल रही है। सामराणी के लोग आज एक सवाल पूछ रहे हैं – “क्या हमारा बच्चा केवल इसलिए पिछड़ेगा क्योंकि वह गांव में पैदा हुआ है?”
अब देखना है कि प्रशासन और सरकार इस चेतावनी को कब तक अनसुना करते हैं।
आखिर ज्वाइनिंग के बाद धरना समाप्त
पीइओ राकेश सिंह ने बताया कि ग्रामीणों की मांग पर ६ टीचर्स का डेपुटेशन किया गया है। उनका ज्वाइनिंग करवा दिया है और धरना समाप्त हो गया है। ग्रामीण वचनाराम देवासी ने सभी अधिकारियों और मीडिया का खासकर सर्कल न्यूज का आभार जताया है।







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