कड़क चेतावनी: सामराणी स्कूल में कल से तालाबंदी!
रानीवाड़ा पंचायत समिति के कोडका ग्राम पंचायत अंतर्गत आने वाले सामराणी गांव की राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी से ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा है। वर्तमान में स्कूल में 5 शिक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं, जिससे पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इसको लेकर आज दर्जनों की संख्या में अभिभावकों व ग्रामीणों ने स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। बच्चों और बालिकाओं ने भी हाथों में तख्तियां लेकर जिला शिक्षा विभाग और राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 22 जुलाई, सोमवार तक शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई, तो स्कूल के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर दी जाएगी। इस मौके पर पीईओ के स्कूल दौरे के दौरान भी ग्रामीणों ने उन्हें ज्ञापन सौंपा और विशेष रूप से गणित व संस्कृत विषय के शिक्षकों की तत्काल नियुक्ति की मांग रखी। ग्रामीणों ने कहा कि बच्चों का शैक्षणिक भविष्य अंधकार में जा रहा है और जिम्मेदार प्रशासनिक अमला आंख मूंदे बैठा है।

पानी को तरसते नल, सूखता भूजल – बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहा गांव
सामराणी गांव न केवल शिक्षा बल्कि पानी जैसी बुनियादी सुविधा से भी वंचित है। जल जीवन मिशन के तहत लगाए गए नलों में लंबे समय से पानी नहीं आ रहा, जिससे ग्रामीणों को रोज़मर्रा के उपयोग के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। भूजल स्तर बेहद नीचे चला गया है और विकल्प के नाम पर गांव के पास कुछ नहीं बचा।
शिक्षक नहीं, तो स्कूल नहीं – ग्रामीणों का एलान
गांव में शिक्षा की ऐसी दुर्दशा को लेकर ग्रामीणों ने कहा कि जब सरकारें “सबका साथ, सबका विकास” की बात करती हैं तो ज़मीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। खाली पड़े शिक्षक पदों की वजह से बच्चों को मजबूरन बिना पढ़ाई के घर लौटना पड़ता है। इस हालात में कोई भी अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार नहीं है।
ग्रामीण प्रतिनिधि वचनाराम देवासी ने बताया कि गांव की समूची 36 कौमें आज एकजुट होकर इस आंदोलन में शामिल हुईं। सबकी एक ही मांग है – “बच्चों को शिक्षक दो, नहीं तो स्कूल बंद करो!”

अब देखने वाली बात होगी कि सोमवार तक शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन इस चेतावनी को कितना गंभीरता से लेता है। अगर ग्रामीणों की मांगें नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है।



