॥ विशेष विधिक जागरूकता समाचार ॥
मालवाड़ा के सरस्वती विद्या मंदिर में 'ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे' अभियान के तहत विधिक जागरूकता शिविर संपन्न; बच्चों को दिए गए आत्मरक्षा व बाल सुरक्षा के महत्वपूर्ण टिप्स
रानीवाड़ा / मालवाड़ा (विशेष संवाददाता): राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालोर के दिशा-निर्देशों के तहत 'ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे' अभियान के अंतर्गत सरस्वती विद्या मंदिर सीनियर सैकण्डरी स्कूल, मालवाड़ा में एक भव्य विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर उपस्थित सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट (आर.जे.एस.) माननीया साक्षी शर्मा ने छात्र-छात्राओं को कानून, व्यक्तिगत सुरक्षा तथा आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के गुर सिखाए।
बाल सुरक्षा का त्रिसूत्रीय कवच: ‘NO - GO - TELL’
न्यायिक मजिस्ट्रेट साक्षी शर्मा ने बच्चों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि वर्तमान समय में बच्चों का जागरूक व सतर्क रहना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बाल सुरक्षा के लिए 'नो-गो-टेल' का सिद्धांत समझाया:
- NO (ना कहें): यदि कोई अपरिचित या संदिग्ध व्यक्ति पास आने या अनुचित बात करने का प्रयास करे, तो बिना झिझक स्पष्ट शब्दों में सीधे 'ना' कहें।
- GO (दूर चले जाएं): ऐसी किसी भी संदिग्ध परिस्थिति में तुरंत उस स्थान को छोड़कर भीड़-भाड़ अथवा सुरक्षित जगह पर चले जाएं।
- TELL (अवश्य बताएं): घटी हुई घटना या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत अपने माता-पिता, गुरुजनों या घर के बड़े सदस्यों को दें।

इन ‘खतरे के संकेतों’ (Danger Signs) को तुरंत पहचानें
न्यायाधीश महोदया ने बच्चों को आगाह करते हुए बताया कि यदि कोई अनजान व्यक्ति बिना किसी कारण के चॉकलेट, महंगे उपहार या लालच दे, परिवार के सदस्यों के बारे में अनावश्यक सवाल पूछे, सुनसान व एकांत जगह ले जाने का दबाव बनाए अथवा पीछा करता दिखे, तो इसे तुरंत खतरे का संकेत समझें और तत्काल सतर्क हो जाएं।
दैनिक जीवन में सुरक्षा के स्वर्णिम नियम
शिविर में विद्यार्थियों को रोजमर्रा के जीवन में सुरक्षा से जुड़े निम्न नियमों को अपनाने की प्रेरणा दी गई:
- परिजनों के संपर्क सूत्र कंठस्थ रखें: सभी बच्चे अपने माता-पिता और अभिभावकों के मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से याद रखें।
- मार्ग की जानकारी दें: घर से स्कूल आने-जाने के रोजाना के रास्ते (Route) की जानकारी हमेशा माता-पिता को देकर निकलें।
- अकेले सफर से बचें: कभी भी सुनसान रास्तों पर अकेले न चलें और अजनबियों पर कतई भरोसा न करें।
- संकट में शोर मचाएं: किसी भी अप्रिय स्थिति या खतरे के समय हिचकिचाएं नहीं, बल्कि जोर से 'हेल्प-हेल्प' (बचाओ-बचाओ) चिल्लाकर आसपास के लोगों का ध्यान आकर्षित करें।
- चाइल्ड हेल्पलाइन 1098: किसी भी प्रकार के संकट या आपात स्थिति में तुरंत बाल हेल्पलाइन नंबर 1098 पर सूचना दें।

शिक्षकों व अभिभावकों से खुला संवाद रखने की अपील
शिविर के समापन पर विद्यालय प्रबंधन एवं अध्यापकों से अपील की गई कि वे शिक्षण संस्थान में ऐसा भयमुक्त और विश्वासपूर्ण वातावरण तैयार करें, जिससे बच्चे किसी भी परेशानी या संकोच के बिना अपनी बात खुलकर साझा कर सकें।

ये रहे उपस्थित: इस जागरूकता कार्यक्रम के दौरान न्यायालय कार्मिक श्री योगेश जांगिड़, टीएलएससी रानीवाड़ा के पीएलवी श्री चन्दुलाल, सरस्वती विद्या मंदिर के निदेशक श्री तरुण गहलोत, प्रबंधक हीना सांखला, प्रधानाचार्य श्री प्रकाश कुमार मोदी सहित विद्यालय का समस्त स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।









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