ग्राम पंचायत के सेवा शिविर ने मिटाया बरसों का 'खातेदारी' क्लेश; मुख्यमंत्री और प्रशासन का जताया आभार
कहते हैं कि जब नीयत साफ हो और सरकार द्वार पर खड़ी हो, तो बरसों पुरानी उलझने भी मिनटों में काफूर हो जाती हैं। कुछ ऐसा ही नजारा ग्राम पंचायत राजीकावास में आयोजित 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' में देखने को मिला, जहां मनोहरजी का वास निवासी राजाराम पुत्र वेलाराम रेबारी की जिंदगी का एक बड़ा रोड़ा हमेशा के लिए हट गया।
बरसों का दर्द, एक जाजम पर हल
राजाराम की खातेदारी भूमि में हिस्सेदारों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि 'एक अनार सौ बीमार' वाली स्थिति बनी हुई थी। जमीन का बंटवारा न होने के कारण न तो कोई अपनी मर्जी से कुआं खोद पा रहा था और न ही सरकार की किसी कृषि सुधार योजना का लाभ मिल पा रहा था। हर बार आपसी सहमति की बात चलती और कागजी दांव-पेंच में उलझकर रह जाती।
"जब तक जमीन अपनी न हो, तब तक मेहनत करने में भी संकोच रहता है। हम बरसों से केवल दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे।" — राजाराम, लाभार्थी
तहसीलदार की तत्परता और 'ऑन द स्पॉट' फैसला
शिविर में जब राजाराम अपनी फरियाद लेकर तहसीलदार नीरज कुमारी के पास पहुंचे, तो प्रशासन ने फाइलों को दबाने के बजाय तुरंत एक्शन मोड अपनाया। तहसीलदार ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए मौके पर ही सभी सह-खातेदारों को बुलवाया।
- कागजी कार्रवाई हुई तेज: राजस्व विभाग की टीम ने फुर्ती दिखाते हुए सारे रिकॉर्ड खंगाले।
- मौके पर रजामंदी: सभी पक्षों को समझा-बुझाकर आवश्यक दस्तावेज तैयार करवाए गए।
- हाथों-हाथ नामांतरण: बरसों से अटका बंटवारा चंद घंटों में जाजम पर ही फाइनल कर नामांतरण दर्ज कर दिया गया।
चेहरों पर लौटी मुस्कान, जताया आभार
जैसे ही राजाराम के हाथ में उनकी स्वतंत्र भूमि के कागज आए, मानो उनके चेहरे पर बरसों की थकान मिट गई। अब सभी खातेदार अपनी-अपनी जमीन के मालिक हैं और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठाने के लिए स्वतंत्र हैं।
राजाराम ने नम आंखों से मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा और स्थानीय प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि इन शिविरों ने हमें वाकई 'सुशासन' का अहसास कराया है। अब गांव का विकास भी दौड़ेगा और किसानों के अरमान भी।







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