जालोर, 24 मई। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय दयालपुरा में समाज सेवा शिविर के दौरान महान क्रांतिकारी अमर शहीद प्रतापसिंह बारहट की जयंती समारोहपूर्वक मनाई गई।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानाचार्य नीबसिंह देवल द्वारा शहीद की तस्वीर पर माल्यार्पण से हुई। राजस्थान मरुधर बैंक के प्रबंधक नवीन शर्मा और संस्कार विद्यालय के संस्थाप्रधान राजेश जांगिड़ ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
विद्यार्थियों ने रखे विचार, क्रांतिकारी जीवन पर हुई चर्चा इस अवसर पर किशोर कुमार, दिव्या कुमारी, अरुणा कुमारी, खुश्बू कंवर, लक्ष्मी कुमारी, कुम कंवर और पार्वती कुमारी ने अमर शहीद के जीवन और योगदान पर अपने विचार प्रकट किए।

अध्यापक गिरिराज सिंह ने प्रतापसिंह बारहट के जन्म से लेकर बरेली जेल में शहादत तक के समय पर विस्तार से प्रकाश डाला। महीपालसिंह करनोत ने उनके परिवार के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि मेवाड़ घराने की गरिमा बनाए रखने में बारहट परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
शिविर प्रभारी नरेंद्र बोस ने केसरीसिंह बारहट, जोरावरसिंह और स्वतंत्रता सेनानी परिवार के योगदान को रेखांकित किया। दलनायक शिक्षक माधुसिंह बालोत ने भगतसिंह के क्रांतिकारी गुरु शचींद्रनाथ सान्याल के विचारों को साझा किया, जिन्होंने अपनी पुस्तक 'बंदी जीवन' में लिखा कि उन्होंने क्रांति प्रतापसिंह बारहट से सीखी।
शहीद प्रतापसिंह बारहट के बलिदान को याद करते हुए उनके ऐतिहासिक शब्द दोहराए गए— "मैं अपनी माता को हंसाने के लिए हजारों माताओं को रुलाना नहीं चाहता।"
समारोह में प्रधानाध्यापक लक्ष्मणदान, व्याख्याता गणपतलाल जीनगर, किरण चौधरी, मणिदान चारण, वरिष्ठ सहायक रमेशकुमार बोस सहित कई गणमान्य लोग और पूर्व विद्यार्थी उपस्थित रहे।







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