पराक्रम दिवस पर पुष्पांजलि अर्पण, 713 वर्षों बाद भी अमर है वीरता की गाथा
वीरता, त्याग और अडिग संकल्प की प्रतिमूर्ति महारावल वीर वीरमदेव सोनगरा चौहान के 713वें बलिदान दिवस पर जालोर में भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। हिन्दू युवा संगठन संस्था और दी जनरल मर्चेंट एसोसिएशन द्वारा वीरमदेव चौक पर उनकी प्रतिमा के समक्ष पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

युद्धभूमि में अजेय थे, समझौते को ठुकराकर वीरगति को अपनाया
वीरमदेव का इतिहास बलिदान और पराक्रम की गौरवगाथा से भरा हुआ है। 1311 ई. में जब अलाउद्दीन खिलजी ने जालोर को निशाना बनाया, तब महारावल वीरमदेव ने ढाई दिन तक अप्रतिम वीरता से संघर्ष किया और अन्ततः रणभूमि में वीरगति को प्राप्त हुए। उनके बलिदान ने जालोर को इतिहास में अमर बना दिया।
खिलजी की पुत्री फिरोजा की अटूट श्रद्धा और राजपूत स्वाभिमान
इतिहास के पन्नों में दर्ज घटनाओं के अनुसार, जब राजकुमार वीरमदेव अलाउद्दीन खिलजी के दरबार में पहुंचे, तो उनकी अदम्य वीरता और अतुलनीय तेजस्विता देखकर खिलजी की बेटी फिरोजा उन पर मुग्ध हो गई। उसने अपने पिता से वीरमदेव से विवाह करने की इच्छा जताई, लेकिन कान्हड़देव ने बिना देर किए इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। राजपूत गौरव, आत्मसम्मान और संस्कृति के रक्षक वीरमदेव ने अपने धर्म और कुल की मर्यादा को सर्वोपरि रखा।
पराक्रम दिवस: वीरता और बलिदान का सम्मान
कार्यक्रम में भाजपा जिला कोषाध्यक्ष एडवोकेट महेंद्र मुणोत, हिन्दू युवा संगठन संस्थापक अध्यक्ष एडवोकेट सुरेश सोलंकी, दी जनरल मर्चेंट एसोसिएशन अध्यक्ष जालमसिंह नरावत, भाजपा नेता एडवोकेट दिनेश महावर सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने वीरमदेव के बलिदान पर प्रकाश डाला।
हिन्दू युवा संगठन के अध्यक्ष सुरेश सोलंकी ने कहा, “वीरमदेव ने स्वाभिमान और धर्म की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति दी। हमें उनके बलिदान को कभी नहीं भूलना चाहिए।”
वीरता की विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा
कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं ने वीर वीरमदेव को आदर्श मानते हुए उनके शौर्य और बलिदान को नमन किया। इस अवसर पर मूलसिंह, रमेश सेठ, सुरेश जैन, कैलाश लखारा, धर्मेंद्र पटवा, हेमेंद्रसिंह बगेड़िया, मयंक देवड़ा, मुकेश सिंधी, सुरेश रामावत सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।



