जालोर के वरिष्ठ समाजसेवी हीराचन्द भण्डारी ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व चुनाव आयोग को भेजा पत्र; ईसीआई ने लिया संज्ञान, मांगी विधानसभा क्षेत्र की जानकारी
स्थानीय निकायों और पंचायतीराज चुनाव की आरक्षण व्यवस्था में भारी विसंगति सामने आई है। जालोर के वरिष्ठ आरटीआइ कार्यकर्ता और समाजसेवी हीराचन्द भण्डारी ने राष्ट्रपति महोदया, प्रधानमंत्री तथा मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर आरक्षण व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव की मांग उठाई है। उन्होंने उजागर किया है कि लॉटरी और आरक्षण प्रक्रिया के दौरान कई ऐसे वार्डों को एससी या एसटी वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया जाता है, जहां संबंधित वर्ग का एक भी परिवार या नागरिक निवास नहीं करता।
खुद उनके अपने वार्ड में इस तरह की स्थिति बन चुकी है। उनका कहना है कि इस गैर-व्यावहारिक आरक्षण नीति के कारण स्थानीय जनता का लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित होता है और वार्ड में योग्य व स्थानीय उम्मीदवार न मिलने से विकास कार्य पूरी तरह ठप हो जाते हैं। उन्होंने सुझाव दिया है कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार को संबंधित वार्ड का मूल व स्थाई निवासी होना अनिवार्य किया जाए, ताकि वह वार्ड की वास्तविक समस्याओं को समझकर उनका निस्तारण कर सके।

चुनाव आयोग ने दिया जवाब, मांगी जानकारी
इस गंभीर शिकायत और सुझाव पर भारत निर्वाचन आयोग (PGRS Cell ECI) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हीराचन्द भण्डारी को ईमेल के माध्यम से आधिकारिक जवाब भेजा है। आयोग ने पत्र प्राप्ति की पुष्टि करते हुए मामले को आगे बढ़ाने के लिए उनसे उनके संबंधित विधानसभा क्षेत्र (Assembly Constituency - AC) का विवरण मांगा है, ताकि इस शिकायत पर आगामी विभागीय प्रक्रिया शुरू की जा सके।
क्या निकलेंगे परिणाम?
इस मांग और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा इस शिकायत को प्रक्रिया में शामिल किए जाने से आने वाले समय में महत्वपूर्ण परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
- आयोग स्तर पर समीक्षा: निर्वाचन आयोग द्वारा विधानसभा क्षेत्र का ब्योरा मांगने से इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि स्थानीय निकायों और पंचायतीराज में आरक्षण विसंगतियों तथा वार्डवार जनसांख्यिकी डेटा की पड़ताल की जा सकती है।
- कानूनी संशोधन की संभावना: यदि सरकार और चुनाव आयोग इस सुझाव को स्वीकार करते हैं, तो पंचायतीराज व नगर निकाय चुनाव नियमों में बदलाव कर वार्ड के आरक्षण को वहां की वास्तविक आबादी के आधार पर तय करने का प्रावधान बन सकता है।
- स्थानीय नेतृत्व को मजबूती: चुनाव लड़ने के लिए वार्ड का मूल निवासी होना अनिवार्य किए जाने से कागजी या बाहरी प्रत्याशियों की जगह स्थानीय जनप्रतिनिधियों को नेतृत्व करने का मौका मिलेगा।
- विकास कार्यों में तेजी: वार्ड की जमीनी और मूलभूत समस्याओं से भली-भांति परिचित जनप्रतिनिधि चुने जाने से स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिल सकेगी।









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