गुजरात सरकार ने एक बेहद संवेदनशील और मानवीय फैसला लेते हुए पूरे राज्य में 'ग्लू ट्रैप' (गोंद वाले पैड) के निर्माण, बिक्री, भंडारण और इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। बेज़ुबान छोटे जीवों को तड़पा-तड़पाकर मारने वाली इस क्रूर विधि को बंद करने का यह कदम वाकई सराहनीय है।
जानलेवा गोंद का सच: आखिर ग्लू ट्रैप से क्या नुकसान था? ग्लू ट्रैप पर बेहद मजबूत और न सूखने वाला सिंथेटिक केमिकल गोंद लगा होता है। जब कोई चूहा या छोटा पक्षी इस पर चिपकता है, तो खुद को छुड़ाने की कोशिश में उसकी त्वचा छिल जाती है और हड्डियाँ तक टूट जाती हैं। बेज़ुबान जीव कई दिनों तक बिना खाने-पानी के तड़पता रहता है और अंत में भूख, प्यास या दम घुटने से उसकी दर्दनाक मौत हो जाती है। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत इसे अत्यधिक क्रूर और अमानवीय माना गया है।
किससे बनता है यह घातक गोंद? ग्लू ट्रैप में इस्तेमाल होने वाला गोंद कोई प्राकृतिक गोंद (जैसे पेड़ का गोंद) नहीं होता। यह सिंथेटिक रबर, रेजिन (Resin), और मिनरल ऑयल/प्लास्टिसाइज़र को मिलाकर बनाया जाता है। इसे हॉट-मेल्ट एडहेसिव (Hot-melt Adhesive) या गैर-सुखाने वाला गोंद कहते हैं, जो हवा के संपर्क में आने के बावजूद लंबे समय तक चिपचिपा बना रहता है।
मुख्य बातें और नए नियम:
- कानूनी कार्रवाई: प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों पर BNSS की धारा 163 और BNS की धारा 223 के तहत मामला दर्ज होगा।
- दुकानों और ऑनलाइन बिक्री पर रोक: GeM पोर्टल और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से ग्लू ट्रैप की लिस्टिंग हटा दी गई है। व्यापारियों को तुरंत सारा स्टॉक हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
- मानवीय विकल्प अपनाएं: सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे चूहों को पकड़ने के लिए पारंपरिक पिंजरों (Cage Traps) या अन्य वैज्ञानिक और गैर-घातक (Non-lethal) तरीकों का ही इस्तेमाल करें।







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