राजस्थान संपर्क पोर्टल पर तीन बार शिकायत के बाद जागी प्रशासन की नींद, JEN ने दिए काम शुरू करने के निर्देश; क्या कागजी साबित होगा निरीक्षण?
Circle News Network सांचौर। मरुधरा में पानी की एक-एक बूंद की कीमत क्या होती है, यह यहां के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों से बेहतर कोई नहीं समझ सकता। लेकिन जब सरकारी तंत्र की लापरवाही और कछुआ चाल आम आदमी की उम्मीदों पर पानी फेर दे, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। ऐसा ही एक गंभीर मामला जालौर जिले की पंचायत समिति सांचौर की ग्राम पंचायत धानता से सामने आया है, जहां एक गरीब बीपीएल परिवार पिछले चार साल से अपने हक के पानी के लिए तरस रहा है।
बिना आगोर के कैसे भरेगा टांका? ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, ग्राम पंचायत धानता निवासी लादूराम पुत्र विरदाराम के घर के हालात सरकारी दावों की हकीकत बयां कर रहे हैं। वर्ष 2022 में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के तहत इस बीपीएल परिवार के लिए एक जल टांका निर्माण कार्य स्वीकृत हुआ था।
इस बात को आज चार साल बीत चुके हैं, लेकिन धरातल पर काम आज भी अधूरा है। अधिकारियों और ठेकेदारों की लापरवाही का आलम यह है कि टांके का आंशिक ढांचा तो खड़ा कर दिया गया, लेकिन इसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यानी 'आगोर' (कैचमेंट एरिया) बनाना ही भूल गए। राजस्थान जैसे जल संकट वाले क्षेत्र में जहां बारिश बेहद कम होती है, वहां बिना आगोर के बारिश का पानी टांके तक पहुंचना नामुमकिन है। ऐसे में लाखों रुपये की लागत से बनने वाली यह जल संरचना सिर्फ एक खोखला गड्ढा बनकर रह गई है।
अधिकारियों के चक्कर काट कर थक गया पीड़ित परिवार पीड़ित लादूराम के परिवार ने बताया कि उन्होंने इस अधूरे निर्माण को पूरा करवाने के लिए व्यवस्था के हर दरवाजे पर दस्तक दी। न्याय की आस में उन्होंने राजस्थान संपर्क पोर्टल पर एक-दो बार नहीं, बल्कि पूरे तीन बार ऑनलाइन शिकायतें दर्ज करवाईं। इसके अलावा जिला कलेक्टर, उपखंड अधिकारी (SDM), विकास अधिकारी (BDO), ग्राम विकास अधिकारी (VDO) और स्थानीय सरपंच को भी कई बार लिखित और मौखिक रूप से अपनी व्यथा सुनाई। लेकिन वर्षों तक उनकी फाइलों पर धूल जमती रही और कोई समाधान नहीं निकला।
शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन, मौके पर पहुंचे JEN लगातार उठ रहे सवालों और शिकायतों के बाद आखिरकार कल प्रशासन की नींद टूटी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक कनिष्ठ अभियंता (JEN) और एक अन्य विभागीय कर्मचारी मौके पर निरीक्षण के लिए पहुंचे। इस दौरान मौके पर स्थानीय सरपंच को भी तलब किया गया। अधूरे पड़े कार्य को देखकर अधिकारियों ने नाराजगी जताई और सरपंच व संबंधित एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिए कि हर हाल में अगले ही दिन से इस अधूरे कार्य को दोबारा शुरू करवाया जाए और आगोर का निर्माण पूरा किया जाए।
क्या है मनरेगा टांका निर्माण योजना? आपको बता दें कि राजस्थान के ग्रामीण और विशेषकर पश्चिमी इलाकों में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए मनरेगा के तहत व्यक्तिगत टांका निर्माण योजना चलाई जाती है। इसके तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, बीपीएल परिवारों और सीमांत किसानों के खेतों या घरों में सरकारी खर्च पर टांके का निर्माण किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का संचयन (Rainwater Harvesting) करना है ताकि गर्मियों के दिनों में ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भटकना न पड़े। नियमानुसार टांके के साथ एक पक्का आगोर (ढालूदार चबूतरा) बनाना अनिवार्य होता है, जिससे बहकर आने वाला बारिश का पानी साफ होकर टांके के अंदर बने फिल्टर से होता हुआ स्टोर हो सके। धानता पंचायत में इसी नियम को ताक पर रख दिया गया।
बड़ा सवाल: क्या धरातल पर दिखेगा असर? प्रशासनिक अमले ने मौके पर जाकर निर्देश तो दे दिए हैं, लेकिन ग्रामीणों के जेहन में अब भी कई सवाल तैर रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राजस्थान संपर्क पोर्टल और जिला कलेक्टर तक पहुंची इस आवाज का असर वास्तव में धरातल पर दिखाई देगा? क्या चार साल से प्यासा पड़ा लादूराम का यह टांका इस बार बारिश के पानी से भर पाएगा या फिर हर बार की तरह यह निरीक्षण भी केवल फाइलों को बंद करने और औपचारिकता पूरी करने का जरिया बनकर रह जाएगा? क्षेत्र के लोग अब इस मामले में त्वरित कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
"दिनेश जाणी, सर्कल न्यूज नेटवर्क, सांचौर।"







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