AMRUT 2.0 के तहत करोड़ों खर्च – जमीनी हकीकत शून्य, बिलों में गड़बड़ी, नेताओं की सरपरस्ती में अफसर-ठेकेदार Nexus!

भीनमाल का ‘अमृत’ बन रहा ‘अभिशाप’, करदाताओं का पैसा काग़ज़ों पर उड़ाया जा रहा है। जाकोब तालाब के पुनर्जीवन के नाम पर 1.61 करोड़ की निविदा 1.37 करोड़ में स्वीकृत हुई, पर असलियत हैरान कर देने वाली है:
बड़ा घोटाला: घिसा-पिटा काम दोबारा शामिल, फर्जी मोजमाप और रकम का बंदरबांट
- पुराने निर्माण की दोबारा एंट्री: तालाब की बाहरी पाल, जो दस साल पहले दानदाता बनवा चुके, हैरतअंगेज़ ढंग से नए प्रोजेक्ट में फिर शामिल।
- वृक्षारोपण का दिखावा: जहां पहले से सैकड़ों पेड़ मौजूद, वहां हजारों खर्च कर देने का खेल। Google Maps और मौके की जांच से पोल खुली।
- मोजमाप में फ़र्जीवाड़ा: 45 लाख की फाइल बनी, जिनमें ऐसे काम भी शामिल – जो ज़मीन पर कभी हुए ही नहीं। यह सब विभागीय मिलीभगत के बगैर मुमकिन ही नहीं।
- धीमी प्रगति, तेज़ भुगतान: मजदूर, मशीनरी नदारद, पर बिल बनकर तेजी से भुगतान।

विभागीय अफसर-ठेकेदार का गठजोड़:
- सहायक अभियंता की अनुपस्थिति का फायदा: जब भी आते – केवल बिल साइन करते, बाकी वक्त गायब। आरोपों के मुताबिक, जयपुर में बैठे-बैठे तारीख बढ़वाने का जुगाड़।
- ठेकेदार की रसूखदारी: मंत्री का रिश्तेदार होने का फायदा, फाइलें खुद के नियंत्रण में, अधिकारियों की बोलती बंद।
- राजनीतिक दबाव की गूंज: निविदा प्रक्रिया में 24% कम रेट वाले जयपुर की फर्म पर दबाव डालकर, 11% कम वाले स्थानीय ठेकेदार के नाम टेंडर – भारी सरकारी नुकसान, खुली धांधली!
नगरवासियों में आक्रोश – आंदोलन की चेतावनी:
- श्री निमगोरिया खेतलाजी ट्रस्ट का ज्ञापन: धांधली की शिकायत दर्ज, भुगतान रोकने की मांग, फिर भी 24 लाख का संदिग्ध भुगतान – अब 50 लाख की तैयारी।
- करदाताओं के पैसे की बर्बादी: जब काम नहीं, बिल फर्जी, जिम्मेदार लापता – भविष्य में तालाब के फिर उपेक्षित रह जाने का खतरा मंडरा रहा है।
आरयूडीएसआईसीओ को जानकारी – पर अभी भी अस्पष्टता
सूत्रों के अनुसार, RUDSICO तक सूचना पहुंच गई है, विचार चल रहा– परियोजना मौजूदा स्वरूप में चले या नई निविदा हो। पर जब तक ठोस कार्रवाई नहीं, तब तक नगरवासियों की चिंता जायज।
तालाबों के पुनरुद्धार के नाम पर चल रही योजनाओं में अनियमितता देशव्यापी समस्या बन चुकी है – अमृत 2.0 जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं कागज़ों पर लबालब पानी और जमीनी हकीकत में गड्ढों का शोकगीत बनती जा रही हैं।
अब सवाल है: कब होगी इस घोटाले की निष्पक्ष जांच? दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई या फिर जाकोब तालाब एक बार फिर भ्रष्टाचार और उदासीनता की भेंट चढ़ जाएगा? नगरवासी जवाब मांग रहे!
मेरा सोचना
- सरकारी योजनाओं में फ़र्जी मापन और भुगतान देशभर में सामने आए हैं – जहां काग़ज़ों पर तालाब लबालब, जमीन पर सूखे और अधूरे।
- विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि और ठेकेदारों के नापाक गठजोड़ से दोषियों पर शिकंजा नहीं कस पा रहा।
- कार्यों की गुणवत्ता, निगरानी और पारदर्शिता पर प्रश्र चिह्न—नतीजन करदाताओं का पैसा व्यर्थ।
भीनमाल के नागरिकों का आंदोलन और चौकसी ही है, जो इस तालाब और शहर के भविष्य को संभाल सकता है।
यह प्रकरण न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी है—ठेकेदार-अधिकारी-राजनीतिक गठजोड़ को अब और बर्दाश्त न किया जाए।



