📰 सर्कल न्यूज़ नेटवर्क
(विशेष राज्य समाचार - भीनमाल संस्करण)
सियासत का सबसे बड़ा 'सर्जिकल स्ट्राइक' महासंग्राम | विशेष पड़ताल
बहुसंख्यक आबादी पर अल्पसंख्यक नेताओं का दबदबा: माली और मुस्लिम बाहुल्य बोर्ड में क्या टूटेगा बोहरा परिवार का 'प्राइवेट लिमिटेड' वर्चस्व या फिर पलटेगी पूरी बाजी?
भीनमाल (विशेष संवाददाता)। भीनमाल नगरपालिका चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद अब बोर्ड का नया सिरमौर चुनने को लेकर स्थानीय राजनीति में जबरदस्त भूचाल आ गया है। रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष नामांकन पर्चे दाखिल किए जाने के बाद अब अध्यक्ष पद के लिए सीधा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी मनोज गुप्ता और कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार प्रेमराज बोहरा के बीच एकदम आमने-सामने का हो चुका है। दोनों ही प्रमुख खेमों की ओर से अपने-अपने दावे पेश किए जा रहे हैं और हर दांव-पेच से सत्ता के इस सबसे अहम किले पर कब्जा जमाने की होड़ मची हुई है।
40 सीटों का गणित: 21 का जादुई आंकड़ा पाने को बाड़ेबंदी
नगरपालिका के कुल 40 वार्डों के घोषित नतीजों पर नजर डालें तो चुनावी तस्वीर बेहद दिलचस्प और उलझी हुई नजर आती है। कुल सीटों में से भाजपा के खाते में 19 सीटें आई हैं, जबकि कांग्रेस महज 8 सीटों पर सिमट कर रह गई है। इसके अलावा 13 वार्डों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने परचम फहराया है। 40 सदस्यीय बोर्ड में स्पष्ट बहुमत हासिल करने के लिए 21 पार्षदों का जादुई समर्थन जरूरी है। भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत से महज 2 सीटों की दूरी है, वहीं कांग्रेस समर्थित खेमे को सरकार बनाने के लिए एक बड़ा समर्थन जुटाने की चुनौती है। इसी समीकरण के चलते दोनों ही धड़ों ने निर्दलीय पार्षदों को साधने के लिए दिन-रात एक कर दिया है।
दो-दो के समूह में गाडियों से पहुंचे, दिलाई शपथ
भाजपा खेमे ने अपनी स्थिति पूरी तरह मजबूत रखने और किसी भी तरह की सेंधमारी से बचने के लिए 19 पार्षदों की कड़ी बाड़ेबंदी कर रखी है। चुनाव प्रक्रिया के तहत नामांकित पार्षदों को शपथ दिलाने के दौरान भारी सतर्कता देखने को मिली। भाजपा के पार्षदों को दो-दो के सुरक्षित समूहों में गाड़ियों से लाया गया और शपथ दिलाने के तुरंत बाद पुनः अज्ञात गुप्त ठिकानों पर बाड़ेबंदी के लिए रवाना कर दिया गया। पार्षदों की इस तरह की कड़ी घेराबंदी ने राजनीतिक गलियारों में भारी चर्चा और उत्सुकता पैदा कर दी है।
📌 दिग्गजों ने संभाली अपने-अपने खेमे की कमान
अध्यक्ष पद का यह चुनाव अब केवल दो प्रत्याशियों का साधारण मुकाबला नहीं रह गया है, बल्कि स्थानीय दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है। भाजपा खेमे में पूर्व विधायक पूराराम चौधरी और रानीवाड़ा के पूर्व विधायक नारायण सिंह देवल की सक्रियता देखते ही बन रही है। दूसरी ओर, कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी प्रेमराज बोहरा के पक्ष में भीनमाल विधायक डॉ. समरजीत सिंह की भूमिका बेहद निर्णायक मानी जा रही है।
सामाजिक ताना-बाना: अल्पसंख्यकों की बड़ी धाक
भीनमाल की स्थानीय राजनीति की सबसे अनूठी और विचारणीय परत इसका सामाजिक समीकरण है। भीनमाल नगर में सर्वाधिक आबादी और पार्षदों की संख्या माली समाज और मुस्लिम वर्ग से आती है। बावजूद इसके, अध्यक्ष पद के चुनावी मैदान की शीर्ष कमान अग्रवाल वैश्य समुदाय के मनोज गुप्ता और जैन अल्पसंख्यक वर्ग से आने वाले प्रेमराज बोहरा के हाथों में केंद्रित है। नगर की राजनीति में यह चर्चा जोर-शोर से तैर रही है कि सामाजिक रूप से संख्यात्मक रूप से अल्प होने के बावजूद इन दो वर्गों और परिवारों का प्रशासनिक व राजनीतिक प्रभाव हमेशा बहुसंख्यकों पर भारी पड़ता रहा है।
क्या टूटेगा 'प्राइवेट लिमिटेड' का दशकों पुराना किला?
भीनमाल नगरपालिका की कार्यप्रणाली और सत्ता के इतिहास को गहराई से देखने वाले विश्लेषकों का मानना है कि बोहरा परिवार का पालिका राजनीति में हमेशा से ऐसा प्रभुत्व रहा है जिसे आम बोलचाल में 'प्राइवेट लिमिटेड' की संज्ञा दी जाती रही है। सत्ता चाहे किसी की भी रहे, रणनीतिक चाबी हमेशा इसी परिवार के इर्द-गिर्द घूमती पाई गई है। इस बार मनोज गुप्ता की सीधी चुनौती के बाद यह सवाल हर जुबान पर है कि क्या यह वर्चस्व कायम रहेगा या सत्ता का यह पुराना किला ध्वस्त होगा।
अंतिम दिन किशोर सांखला के नामांकन से बढ़ी हलचल
नामांकन के अंतिम दिन उस समय राजनीतिक माहौल में अचानक जबरदस्त गरमाहट आ गई जब भाजपा के नवनिर्वाचित पार्षद किशोर सांखला निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा भरने एसडीएम कार्यालय पहुंचे। उनके साथ विधायक डॉ. दिनेश परमार सहित भारी संख्या में समर्थक मौजूद थे। इस घटनाक्रम की सूचना मिलते ही भाजपा जिलाध्यक्ष जसराज राजपुरोहित और पूर्व विधायक पूराराम चौधरी तुरंत एसडीएम कार्यालय पहुंचे और वार्ता कर सांखला को अपने साथ लेकर रवाना हुए। इस नाटकीय घटनाक्रम ने अध्यक्ष पद की रेस को और अधिक सस्पेंस से भर दिया है।
निर्दलीयों की चाबी से खुलेगा सत्ता का ताला
अब भीनमाल नगरपालिका अध्यक्ष का अंतिम फैसला पूरी तरह से 13 निर्दलीय पार्षदों के सियासी रुख पर आ टिका है। कौन सा निर्दलीय पार्षद किस खेमे की नैया पार लगाएगा, इसका वास्तविक खुलासा मतदान की अंतिम घड़ियों में ही हो पाएगा। बहरहाल, भीनमाल की राजनीति की यह चौसर सज चुकी है और पूरा शहर उत्सुकता से देख रहा है कि आखिर ऊँट किस करवट बैठता है!









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