मुम्बई। आज के दौर में जहां बैंक बिना कागजी कार्यवाही और गारंटी के कर्ज नहीं देते, वहीं महाराष्ट्र के जलगांव जिले में एक ऐसा 'अनोखा बैंक' चल रहा है जो महिलाओं को बिना किसी ब्याज और नगद भुगतान के आत्मनिर्भर बना रहा है। जलगांव की चालीसगांव तहसील में स्थित यह 'गोट बैंक' (बकरी बैंक) आज सैकडों ग्रामीण महिलाओं की तकदीर बदल चुका है।
🌟 मेमना दीजिए और कर्ज से मुक्ति पाइए
इस बैंक की सबसे बडी खासियत इसका लोन चुकाने का तरीका है। बैंक गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को ऋण के रूप में एक गर्भवती बकरी देता है। इस लोन को चुकाने के लिए महिला को कोई नकद राशि नहीं देनी होती। बैंक की शर्त बस इतनी है कि जब बकरी बच्चे को जन्म दे और वह बच्चा (मेमना) बडा हो जाए, तो एक मेमना बैंक को लौटाना पडता है। इसके बाद वह बकरी और उसके अन्य बच्चे पूरी तरह महिला की संपत्ति बन जाते हैं।
📈 कमाई का जरिया और प्रशिक्षण
पुणे के सेवा सहयोग फाउंडेशन द्वारा संचालित इस बैंक ने गरीब, विधवा और एकल महिलाओं को सशक्त बनाने का बीडा उठाया है। बैंक के कामकाज का तरीका बेहद पारदर्शी है:
- वैज्ञानिक ट्रेनिंग: बकरी पालन शुरू करने से पहले महिलाओं को इसकी बारीकियों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है।
- बकरी वितरण: ट्रेनिंग पूरी होने के बाद महिलाओं को स्वस्थ और गर्भवती बकरी सौंपी जाती है।
- सालाना आय: सेवा सहयोग फाउंडेशन के अनुसार, एक बकरी वर्ष में 3 से 4 मेमनों को जन्म देती है। बैंक को एक बच्चा लौटाने के बाद, बाकी को बेचकर महिलाएं सालाना 30,000 रुपए तक की अतिरिक्त आय कर रही हैं।
🎯 आत्मनिर्भरता की नई मिसाल
इस अनूठे प्रयोग से अब तक इलाके की 300 से ज्यादा महिलाएं स्वावलंबी बन चुकी हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला यह मॉडल न केवल महिलाओं को आर्थिक आजादी दे रहा है, बल्कि समाज में उनके आत्मविश्वास को भी बढा रहा है।







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