रानीवाड़ा, 05 जुलाई 2025: महाराष्ट्र के मीरा भायंदर में राजस्थानी प्रवासी व्यापारियों पर मराठी भाषा न बोलने के नाम पर हुए बर्बर हमले और अपमान ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस अमानवीय घटना के खिलाफ राजस्थान के पूर्व विधायक और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष नारायण सिंह देवल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को कड़ा पत्र लिखकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई और प्रवासियों की सुरक्षा की मांग की है। लेकिन सरकार की खामोशी और निष्क्रियता से सवाल उठ रहे हैं कि क्या महाराष्ट्र में प्रवासियों के लिए कोई सुरक्षित जगह बची है?

मराठी-गैर मराठी भेदभाव की ताजा मिसाल
5 जुलाई 2025 को मीरा भायंदर के व्यस्त बाजार में कुछ स्थानीय गुंडों ने राजस्थानी व्यापारियों को निशाना बनाया। कारण? सिर्फ इतना कि वे मराठी नहीं बोल रहे थे। दुकानदारों को न केवल पीटा गया, बल्कि सार्वजनिक रूप से अपमानित भी किया गया। इस घटना ने एक बार फिर महाराष्ट्र में भाषाई भेदभाव और क्षेत्रवाद की गहरी जड़ों को उजागर किया है। स्थानीय पुलिस ने कथित तौर पर मामले को दबाने की कोशिश की, जिससे पीड़ितों का गुस्सा और बढ़ गया।
सरकार की चुप्पी: प्रवासियों के साथ सौतेला व्यवहार?
इस घटना के बाद मीरा भायंदर के व्यापारियों ने विरोध में दुकानें बंद कर दीं और सड़कों पर उतर आए। सोशल मीडिया पर #JusticeForRajasthaniMigrants ट्रेंड करने लगा, लेकिन महाराष्ट्र सरकार की ओर से कोई ठोस बयान या कार्रवाई नहीं दिखी। यह पहली बार नहीं है जब प्रवासियों के साथ ऐसा व्यवहार हुआ हो। पिछले साल ठाणे में भी एक राजस्थानी परिवार को इसी तरह निशाना बनाया गया था, और तब भी सरकार ने सिर्फ खोखले वादे किए थे।
नारायण सिंह देवल का सरकार को अल्टीमेटम
नारायण सिंह देवल ने अपने पत्र में बिना किसी लाग-लपेट के सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा, "मीरा भायंदर में राजस्थानी भाइयों के साथ हुई मारपीट और अपमान भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है। राजस्थान के लोग महाराष्ट्र के विकास में अहम योगदान दे रहे हैं, फिर भी उनके साथ ऐसा सौतेला व्यवहार क्यों? यह सरकार की नाकामी है कि प्रवासी आज असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।"
उन्होंने दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। देवल ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो राजस्थान और अन्य राज्यों के प्रवासी सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
प्रवासियों का योगदान और सरकार की उदासीनता
महाराष्ट्र में लाखों राजस्थानी रोजगार, व्यवसाय और शिक्षा के लिए बसे हैं। अपने व्यापारिक कौशल और मेहनत से वे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं। लेकिन बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं न केवल उनके मनोबल को तोड़ती हैं, बल्कि महाराष्ट्र की छवि को भी धूमिल करती हैं। सवाल यह है कि क्या सरकार प्रवासियों को सिर्फ वोट बैंक और टैक्स देने वाली मशीन समझती है?
जनता की मांग: इंसाफ और सुरक्षा
मीरा भायंदर की इस घटना ने पूरे देश में गुस्से की लहर पैदा कर दी है। सोशल मीडिया पर लोग सरकार से सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक प्रवासियों को भाषा और क्षेत्र के नाम पर निशाना बनाया जाएगा? नारायण सिंह देवल ने अपने पत्र में साफ कहा, "दोषियों को सजा और प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो, वरना यह आग पूरे देश में फैल सकती है।"
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भाषाई और क्षेत्रीय भेदभाव भारत जैसे विविधतापूर्ण देश के लिए अभिशाप है। क्या महाराष्ट्र सरकार अब भी चुप रहेगी, या प्रवासियों को उनका हक दिलाने के लिए कदम उठाएगी? समय जवाब देगा।







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