सर्कल न्यूज़ नेटवर्क। चितलवाना (जालौर)।
किसानों के हकों की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है! चितलवाना तहसील के किसानों ने अपनी लंबित मांगों और गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए आगामी 27 अक्टूबर को उपखंड मुख्यालय पर विशाल ‘महापड़ाव’ का बिगुल फूंक दिया है। राजस्थान किसान सभा और संयुक्त किसान मोर्चा ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक किसानों को उनका बकाया हक नहीं मिलता, यह संघर्ष जारी रहेगा।
💰 88 करोड़ का बकाया और बीमा क्लेम पर आर-पार
संयुक्त किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष ईशराराम बिश्नोई ने क्षेत्र के किसानों के भारी आक्रोश को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि अकेले चितलवाना तहसील का रबी फसल 2022 का लगभग ₹88 करोड़ का भुगतान पिछले तीन साल से बकाया है। इसके अलावा, कई गाँवों में गिरदावरी ऐप की समस्या के कारण भुगतान रुका हुआ है।
मोर्चा के जिला मंत्री मकाराम चौधरी ने किसानों के साथ हो रहे फसल बीमा घोटाले को उजागर किया। उन्होंने बताया कि रिलायंस कंपनी ने किसानों की बिना अनुमति के लाखों-करोड़ों रुपये प्रीमियम के रूप में काट लिए, लेकिन फसलों में भारी खराबे के बावजूद किसानों को उनका हक, एक रुपए का भी क्लेम नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2023 से अब तक पाँच बार प्रीमियम लेने के बावजूद क्लेम न देना सीधे तौर पर महाघोटाला है, जिसके विरुद्ध अब किसान निर्णायक लड़ाई लड़ेंगे।
💧 सिंचाई और आधारभूत संरचना पर भी हल्ला बोल
राजस्थान किसान सभा के जिला अध्यक्ष विरद सिंह चौहान ने नर्मदा नहर परियोजना की व्यवस्था पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि 27 अक्टूबर से सिंचाई के लिए पानी छोड़ने का निर्णय लिया गया है, जबकि पूरा नहरी सिस्टम अस्त-व्यस्त है। सिंचाई के पानी की समुचित व्यवस्था न होने से किसान रबी की बुवाई कैसे करेंगे? यह सवाल अब प्रशासन से पूछा जाएगा।
तहसील अध्यक्ष भागीरथ गोदारा और सचिव सुरेश खिलेरी ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत तोड़ी गई पाइपलाइनें और स्मार्ट मीटर से जुड़ी बिजली विभाग की समस्याएँ भी इस आंदोलन का हिस्सा होंगी।
🎯 टीमें गठित, पूरी ताकत से तैयारी
महापड़ाव की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। किसानों की ऊर्जा को संगठित करने के लिए क्षेत्रवार किसान कार्यकर्ताओं की टीमें गठित कर उन्हें जिम्मेदारियाँ सौंप दी गई हैं।
ईशराराम बिश्नोई (जिला अध्यक्ष, संयुक्त किसान मोर्चा सांचौर) ने धीमाराम खिलेरी, राणाराम चौरा, केसर सिंह सरवाना, बाबूलाल जाट समेत सभी पदाधिकारियों के साथ मिलकर क्षेत्र के सभी किसानों का आह्वान किया है कि वे 27 अक्टूबर को चितलवाना उपखंड मुख्यालय पर ऐतिहासिक संख्या में पहुँचकर अपनी ताकत दिखाएँ।
यह ‘महापड़ाव’ सिर्फ धरना नहीं, बल्कि किसानों के आत्मसम्मान और हक़ की हुंकार होगा!



